गोड्डा में दुखद घटना: बेटे के गम से उबर भी नहीं पाया था परिवार, सड़क हादसे ने छीन लिया आखिरी सहारा
महागामा में बसुआ चौक के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 77 वर्षीय चुनकू रविदास की पिकअप की चपेट में ...और पढ़ें

गोड्डा में सड़क दुर्घटना। फाइल फोटो
HighLights
महागामा में पिकअप की चपेट में आने से चुनकू रविदास की मौत।
डेढ़ माह पहले बेटे की भी सड़क हादसे में हुई थी मृत्यु।
आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर मुआवजे की मांग की।
संवाद सहयोगी, महागामा (गोड्डा)। महागामा के बसुआ चौक के समीप एनएच 133 पर शनिवार की अहले सुबह हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया।
महागामा वार्ड पांच निवासी 77 वर्षीय चुनकू रविदास की पिकअप वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई।इस हादसे ने उस परिवार के जख्म फिर से हरे कर दिए । चुनकु रविदास का परिवार अभी डेढ़ माह पहले बेटे की असमय मौत के दर्द से उबर भी नहीं पाया था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चुनकू रविदास सुबह अपने घर से चाय पीने के लिए चौक पर निकले थे। इसी दौरान आम लोड करने के लिए पीरपैंती की ओर जा रहा एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन दूसरे वाहन को ओवरटेक करने के क्रम में अनियंत्रित हो गया। वाहन पहले सड़क किनारे लगे बिजली पोल से टकराया और फिर पैदल जा रहे चुनकू रविदास को जोरदार धक्का मार दिया।
टक्कर इतनी भीषण थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। स्थानीय लोग उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने वाहन को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। घटना से आक्रोशित लोगों ने बसुआ चौक पर दोनों तरफ बांस-बल्ला लगाकर और शव को मुख्य मार्ग पर रखकर जाम कर दिया।
सूचना मिलने पर पुलिस इंस्पेक्टर उपेंद्र कुमार महतो, थाना प्रभारी मनोज कुमार पाल, मंत्री विपिन बिहारी सिंह, नगर अध्यक्ष प्रबोध सोरेन, नगर उपाध्यक्ष निलेश सिंह एवं वार्ड पार्षद दिलीप रविदास मौके पर पहुंचे।
प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बाद करीब दो घंटे पश्चात जाम हटाया गया। तब तक वाहनों के लंबी लाइन लग चुकी थी और राहगीरों को परेशानियों को सामना करना पड़ा।
नगर अध्यक्ष प्रबोध सोरेन ने नगर पंचायत परिवार की ओर से मृतक के परिवार को नगर पंचायत में रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया।वहीं सरकारी प्रावधान के तहत पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद चार लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही गई। सबसे मार्मिक दृश्य मृतक के घर पर देखने को मिला।
पत्नी के जीवने का सहारे चले गए
बीते एक मई को उनके पुत्र अर्जुन रविदास की भी दियाजोरी के समीप सड़क हादसे में मौत हो गई थी। बेटे की चिता की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि पिता की मौत ने पूरे परिवार को गहरे अंधकार में धकेल दिया।
पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। विलाप करते हुए वह बार-बार यही कह रही थीं, हे भगवान, आखिर हमसे ऐसी कौन सी भूल हो गई कि पहले बेटा और अब पति को भी छीन लिया।
वर्षों तक रिक्शा चलाकर स्कूली बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचाने वाले चुनकू रविदास अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके जाने से सिर्फ एक परिवार का सहारा नहीं टूटा, बल्कि पूरे इलाके ने एक मेहनतकश और सरल इंसान को खो दिया। इस हादसे ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।
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