झारखंड में दर्दनाक हादसा: टंकी में उतरे दो भाई, एक की सांस थमी; दूसरा मौत से जूझ रहा
महागामा के शांति नगर में शौचालय की टंकी में उतरे दो सगे भाइयों में से एक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। ...और पढ़ें

महागामा में शौचालय टंकी में दम घुटने से एक भाई की मौत, दूसरा जिंदगी और मौत से जूझ रहा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी, महागामा (गोड्डा)। महागामा के शांति नगर में गुरुवार को ऐसा हृदयविदारक हादसा हुआ, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। रोजी-रोटी की तलाश में काम कर रहे दो सगे भाई शौचालय की टंकी में उतरे लेकिन कुछ ही पलों में सब कुछ बदल गया। छोटा भाई हमेशा के लिए खामोश हो गया, जबकि बड़ा भाई जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।
थाना क्षेत्र के डलावर गांव निवासी गडल राउत का 35 वर्षीय बेटा रामकिशोर राउत अपने बड़े भाई 42 वर्षीय प्रमोद राउत के साथ महागामा में एक निर्माणाधीन मकान में काम कर रहा था। शांति नगर स्थित मकान मालिक रविंद्र मोदी के यहां शौचालय टंकी का सेंटरिंग खोलने का काम चल रहा था।
बताया जाता है कि जैसे ही रामकिशोर टंकी के अंदर उतरा, वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा।ऊपर खड़े बड़े भाई प्रमोद ने यह देखा तो खुद को रोक नहीं पाए। छोटे भाई की जान बचाने के लिए वह भी उसी टंकी में कूद पड़े लेकिन यह कोशिश भी भारी पड़ गई। कुछ ही क्षणों में एक भाई मौत के मुंह में समा गए व दूसरा जिंदगी के लिए जूझता रहा।
स्थानीय लोगों एवं थाना प्रशासन की मदद से दोनों को किसी तरह बाहर निकाला गया और महागामा रेफरल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने रामकिशोर को मृत घोषित कर दिया। प्रमोद की हालत नाजुक देख उसे तुरंत सदर अस्पताल गोड्डा रेफर कर दिया गया। हादसे की असली वजह अब तक रहस्य बनी हुई है।
खबरें और भी
भीषण गर्मी में लंबे समय से बंद टंकी के अंदर जहरीली गैस बनने की आशंका जताई जा रही है, जिससे दम घुटने से यह हादसा हुआ। वहीं, कुछ लोग बिजली करंट लगने की भी संभावना जता रहे हैं। चूंकी मृतक व घायल के शरीर पर राख लगे हुए थे।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। उधर, जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची, लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। अस्पताल परिसर में पत्नी, मां, भाभी और बहन की चीख-पुकार से माहौल गूंज उठा।डेढ़ साल पहले ही रामकिशोर की शादी हुई थी। अभी उसकी दुनिया बसनी भी शुरू नहीं हुई थी कि उजड़ गई।
पत्नी रो-रोकर बेसुध हो रही थी। स्वजनों ने बताया कि रामकिशोर छह भाइयों में सबसे मेहनती और जिम्मेदार था। उसकी कमाई से ही घर का चूल्हा जलता था।अब उसके जाने से परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। घटना के बाद मुआवजे की मांग को लेकर परिजन आक्रोशित हो उठे और मकान मालिक के सामने डट गए।
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी मनोज कुमार पाल पुलिस बल के साथ पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन देर शाम तक माहौल गम और गुस्से के बीच झूलता रहा।
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन तमाम मजदूरों की हकीकत है जो बिना किसी सुरक्षा के अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।सवाल वही है आखिर मजदूरों की जान की कीमत कब समझी जाएगी।