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    गुमला में मनरेगा की 48,681 योजनाएं अब भी अधूरी, पौधरोपण से पीएम आवास तक... हजारों विकास कार्य अटके

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 10:57 AM (IST)

    गुमला जिले में मनरेगा के तहत 48,681 विकास योजनाएं अधूरी पड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इनमें वृक्षारोपण, आवास, कुएं और डोभा निर् ...और पढ़ें

    गुमला में 48,681 मनरेगा योजनाएं अधूरी पाई गईं।

    गुमला में 48,681 मनरेगा योजनाएं अधूरी पाई गईं।

    HighLights

    1. गुमला में 48,681 मनरेगा योजनाएं अधूरी पाई गईं।

    2. वृक्षारोपण, आवास, कुएं, डोभा प्रमुख लंबित कार्य हैं।

    संतोष कुमार, गुमला। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत गुमला जिले में विकास कार्यों की रफ्तार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विकसित भारत ग्राम एक्ट की रिपोर्ट ने चौंकाने वाले हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 और उससे पहले की 48,681 योजनाएं अब भी अधूरी हैं। इनमें सबसे अधिक वृक्षारोपण, प्रधानमंत्री आवास, अबुआ आवास, कुआं और डोभा निर्माण से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। इससे ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है।

    सबसे अधिक 7,914 अधूरी योजनाएं गुमला प्रखंड में दर्ज हैं। इसके बाद घाघरा में 6,112, पालकोट में 4,812, चैनपुर में 4,802, रायडीह में 4,255, बसिया में 4,238, सिसई में 4,042, भरनो में 3,231, विशुनपुर में 2,793, डुमरी में 2,469, कामडारा में 2,458 और अल्बर्ट एक्का में 1,555 योजनाएं वर्षों से लंबित हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार 19,198 पौधरोपण कार्य, 7,264 अबुआ आवास, 5,812 प्रधानमंत्री आवास, 5,060 कुएं, 3,756 डोभा, 1,215 ट्रेंच कम बंड (टीसीबी) समेत हजारों योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। फॉर्म पॉन्ड, चेकडैम, पशु शेड, मुर्गी शेड और मिट्टी सड़क जैसी परिसंपत्तियां भी पूरी नहीं हो सकी हैं।

    ये वही योजनाएं हैं, जिनका उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार देने के साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना था। लेकिन वर्षों बाद भी हजारों कार्य अधूरे रहने से योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    जिला प्रशासन ने अधिकारियों को लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 48 हजार से अधिक अधूरी योजनाओं की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और ग्रामीणों को इनका पूरा लाभ कब मिलेगा।

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    क्या कहते हैं अधिकारी?

    अपूर्ण योजनाएं विकसित भारत ग्राम में शामिल कर ली गई है। अपूर्ण योजनाओं को युद्ध स्तर पर पूरा किया जाएगा।

    -इरफान आरिफ, सहायक परियोजना पदाधिकारी गुमला