शौचालय है, पानी नहीं… मशीनें हैं, पैड नहीं... हजारीबाग के स्कूल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
जागरण की टीम ने हजारीबाग के टाटीझरिया प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के ब ...और पढ़ें
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हजारीबाग के स्कूलों में लड़कियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव। फोटो जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मिथिलेश पाठक, टाटीझरिया (हजारीबाग)। सुप्रीम कोर्ट द्वारा विद्यालयों में छात्राओं के लिए सेनेटरी पैड, स्वच्छ शौचालय और पेयजल की अनिवार्य व्यवस्था के स्पष्ट निर्देश के बाद जागरण की टीम ने टाटीझरिया प्रखंड के कई सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया।
सामने आई तस्वीर बता रही थी कि शिक्षा विभाग की उदासीनता का खामियाजा सीधे तौर पर ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। मासिक धर्म के दौरान सेनेटरी पैड की अनुपलब्धता और शौचालयों की बदहाल स्थिति के कारण कई छात्राएं विद्यालय आना ही छोड़ देती हैं।
दैनिक जागरण की टीम ने जब प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों का जायजा लिया, तो स्थिति चिंताजनक पाई गई। मध्य विद्यालय खंभवा में बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय तो बने हैं, लेकिन शौचालय में नल टूटा हुआ है, गंदगी पसरी हुई है और दुर्गंध के कारण वहां जाना मुश्किल हो जाता है।
सेनेटरी पैड के बारे में पूछे जाने पर प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार साव ने बताया कि लगभग एक वर्ष पूर्व कुछ पैड मिले थे, जिन्हें छात्राओं में वितरित कर दिया गया था। इसके बाद न तो दोबारा आपूर्ति हुई और न ही विभाग की ओर से कोई पूछताछ।
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मध्य विद्यालय अमनारी में हाल ही में उन्नयन कार्य कराया गया है। यहां दो-दो शौचालय बने हुए हैं और उनकी स्थिति भी अपेक्षाकृत बेहतर है। हालांकि उन्नयन कार्य के दौरान ठेकेदार द्वारा सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन उखाड़ दी गई, जिसे आज तक दोबारा नहीं लगाया गया।
परिणामस्वरूप छात्राओं को पैड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। प्रधानाध्यापक छोटन राम ने बताया कि विद्यालय में पानी की भी गंभीर समस्या है। छात्रा अलीजा खातून और सुभानी कुमारी ने बताया कि शौचालय की व्यवस्था ठीक है, लेकिन सेनेटरी पैड न मिलने से उन्हें परेशानी होती है।
उत्क्रमित उच्च विद्यालय खैरा करमा का परिसर साफ-सुथरा और व्यवस्थित दिखा। चहारदीवारी के कारण यहां शैक्षणिक वातावरण भी शांत है। बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय तथा पानी की व्यवस्था मौजूद है। दो वर्ष पूर्व मुखिया द्वारा यहां सेनेटरी पैड मशीन लगाई गई थी, लेकिन वह अब खराब पड़ी है।
प्रधानाध्यापक मोनूलाल गुप्ता ने बताया कि फिलहाल छात्राओं की जरूरत को देखते हुए एक स्थान पर पैड रखे जाते हैं, जहां से वे स्वयं ले जाती हैं। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि सेनेटरी पैड जैसी बुनियादी सुविधा की अनदेखी से छात्राओं की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते शिक्षा विभाग ने इस ओर गंभीर कदम नहीं उठाए, तो बालिका शिक्षा पर इसका नकारात्मक असर और गहराता जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन कागजों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर सुनिश्चित करना अब समय की मांग है।