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    Jharkhand News: 3 दिनों की खोज के बाद मिला खूंखार हाथियों का ठिकाना, हजारीबाग में 7 लोगों की ले चुके हैं जान

    Updated: Wed, 18 Feb 2026 07:55 AM (IST)

    हजारीबाग के चुरचू प्रखंड में 7 लोगों की मौत के जिम्मेदार पांच जंगली हाथियों का झुंड तीन दिन की तलाश के बाद चड़री पहाड़ी की तलहटी में मिला। वन विभाग की ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. तीन दिन की सघन खोज के बाद हाथियों का झुंड मिला।

    2. ड्रोन कैमरों और ग्रामीणों की मदद से ठिकाना पता चला।

    3. हाथियों को सुरक्षित जंगल में खदेड़ने की रणनीति जारी।

    संवाद सूत्र जागरण, चरही (हजारीबाग)। चुरचू प्रखंड में सात लोगों की दर्दनाक मौत के बाद दहशत का पर्याय बने पांच जंगली हाथियों के झुंड का आखिरकार मंगलवार को पता चल गया।

    लगातार तीन दिनों तक जंगलों को खंगालने के बाद वन विभाग की राज्य स्तरीय संयुक्त टीम ने चड़री पहाड़ी की तलहटी में झुंड को चिन्हित करने में सफलता प्राप्त की। ड्रोन कैमरों की मदद से की गई निगरानी इस अभियान में निर्णायक साबित हुई।

    घटना के बाद हाथियों का झुंड लगातार स्थान बदल रहा था। कभी करगी, तो कभी बोदरा, बाली, बागजोबरा, कीमो और मयूरनचवा के जंगलों में उनकी गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ था। कई गांवों में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जा रहा था। लोग खेतों और जंगल की ओर जाने से बच रहे थे।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा के वन विभाग की टीमों को भी लगाया गया। रामगढ़, कोडरमा, गिरिडीह, चतरा और बोकारो जिलों से सात क्यूआरटी टीमों का गठन कर सघन सर्च अभियान चलाया गया। जंगलों की ऊंची पहाड़ियों और घने इलाकों में ड्रोन कैमरे से लगातार निगरानी की जाती रही।

    अभियान के दौरान स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका भी अहम रही। ग्रामीणों द्वारा बताए गए मार्ग और हाथियों के गोबर व पैरों के ताजा निशानों का पीछा करते हुए टीम चड़री पहाड़ी की तलहटी तक पहुंची, जहां झुंड विश्राम करता पाया गया।

    इस अभियान में हजारीबाग आरसीएफ आरएन मिश्रा, बोकारो आरसीएफ तांगा पांडयन, हजारीबाग डीएफओ विकास उज्जवल, रामगढ़ डीएफओ नीतीश कुमार, चतरा डीएफओ राहुल मीणा, कोडरमा डीएफओ सामित्व शुक्ला सहित कई रेंजर व वनकर्मी सक्रिय रहे। ओड़िसा की दस सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भी मौके पर मौजूद रही।

    वन विभाग ने आसपास के गांवों में माइकिंग कर लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। हाथियों को सुरक्षित रूप से आबादी क्षेत्र से दूर जंगल के भीतर खदेड़ने की रणनीति पर काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक झुंड पूरी तरह सुरक्षित क्षेत्र में नहीं पहुंच जाता, तब तक निगरानी और सर्च अभियान जारी रहेगा।