हजारीबाग में बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक, रोजाना आ रहे घायल मरीज
बरसात के मौसम में हजारीबाग के चुरचू प्रखंड में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है, जिससे प्रतिदिन 4-5 लोग कुत्ते के काटने से घायल होकर अस्पताल पहुंच रहे ...और पढ़ें

चुरचू प्रखंड में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ा। जागरण
HighLights
चुरचू प्रखंड में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ा।
प्रतिदिन 4-5 लोग कुत्ते के काटने से घायल।
संवाद सूत्र, चरही (हजारीबाग)। बरसात शुरू होते ही चुरचू प्रखंड में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। हर रोज चरही पीएचसी और चुरचू सीएचसी में कुत्तों के काटने से घायल होकर आने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य केंद्रों के अनुसार, इस मौसम में प्रतिदिन 4 से 5 लोग कुत्ते के काटने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। रात के अंधेरे में कुत्तों की सक्रियता और बढ़ जाती है, जिससे राहगीरों और बच्चों को हमेशा खतरा बना रहता है।
राहत की बात यह है कि चुरचू प्रखंड के स्वास्थ्य केंद्रों में फिलहाल एंटी रेबीज के टीके उपलब्ध हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने पर समय पर टीका लगवाना बेहद जरूरी है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि टीके की आपूर्ति बनाए रखना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है।
अभी बरसात का मौसम है, ऐसे में कुत्तों की आक्रमता बढ़ी हुई देखी जा सकती है। जहरीले सांप और कीड़े जमीन से निकल आते हैं। अस्पतालों में कुत्तों के काटने पर एंटी रेबीज की सुई और सांप के काटे जाने पर तत्काल एंटी स्नेक वेनम सीरम की टीके उपलब्ध होना आवश्यक है।
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चुरचू स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोनों तरह के इंजेक्शन उपलब्ध होना सराहनीय पहल है। चुरचू सीएचसी और चरही पीएचसी के अंतर्गत गांवों की आबादी के ख्याल से इंजेक्शन की उपलब्धता होना स्वास्थ्य विभाग का एक सराहनीय कदम है। कुत्तों के काटे जाने पर वर्तमान में रेबीज के इंजेक्शन और एवीएस एंटी स्नेक वेनम की सूई उपलब्ध है।
आवश्यकता पड़ने पर विभाग पूरी तरह तैयार है। स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि रात में कुत्तों की झुंड हर गांव के मोहल्लों में झुंड में भौंकते रहते हैं।
बकरी के बच्चों को झुंड मिलकर नोच लेते हैं। सबसे परेशानी स्कूली बच्चों के प्रति डर बना रहता है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर अपेक्षित नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। बढ़ती कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण लगाया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।