झारखंड का नया इको टूरिज्म केंद्र बनेगा हजारीबाग, जवाहर घाटी के 53 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहा पार्क
बरही के तिलैया डैम स्थित जवाहर घाटी में 53 एकड़ में अत्याधुनिक इको टूरिज्म पार्क विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना 2027 तक पूरी होगी, जिससे स्थानीय र ...और पढ़ें

डीएफओ मौन प्रकाश। फोटो जागरण
HighLights
तिलैया डैम की जवाहर घाटी में 53 एकड़ का इको टूरिज्म पार्क।
प्रथम चरण में 6.70 करोड़ से पार्क, गार्डन, एम्फीथिएटर का निर्माण।
2027 तक पूर्ण होगी परियोजना, स्थानीय रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा।
प्रमोद विश्वकर्मा, बरही (हजारीबाग)। झारखंड का प्रमुख प्रवेश द्वार माने जाने वाला बरही अनुमंडल जल्द ही पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने जा रहा है।
बरही-एनएच-31 स्थित तिलैया डैम की मनोरम जवाहर घाटी में पहाड़, जंगल और जलाशय के बीच करीब 53 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक इको टूरिज्म पार्क विकसित किया जा रहा है।
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सहयोग से हजारीबाग वन प्रमंडल इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मूर्त रूप दे रहा है।
परियोजना के संबंध में पश्चिमी वन प्रमंडल के डीएफओ मौन प्रकाश ने बताया कि प्रथम चरण में 30 एकड़ क्षेत्र के विकास के लिए 6.70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्माण कार्य तेजी से जारी है और वर्ष 2027 तक पूरी परियोजना पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
दो चरण में होगा काम
उन्होंने बताया कि बताया कि पहले चरण में चिल्ड्रेन पार्क, फ्लावर गार्डन, बॉटनिकल गार्डन, सेंट्रल डाइनिंग हॉल, आकर्षक लैंडस्केपिंग, एम्फी थिएटर, टूरिस्ट शेड, रेस्ट रूम और गार्ड रूम का निर्माण कराया जा रहा है। इन सुविधाओं से पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण के बीच आधुनिक पर्यटन का अनुभव मिलेगा।
दूसरे चरण में शेष 23 एकड़ क्षेत्र का विकास किया जाएगा। इसमें 34 आधुनिक कॉटेज, करीब 1600 मीटर लंबा ट्रैकिंग पाथवे तथा बच्चों और वयस्कों के लिए अलग-अलग वाटर स्पोर्ट्स की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे तिलैया डैम क्षेत्र इको टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकेगा।
ईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
डीएफओ ने बताया कि विभाग का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ सतत पर्यटन को बढ़ावा देना है। परियोजना पूरी होने पर स्थानीय लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। होटल, परिवहन, भोजनालय, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा।
विभाग को उम्मीद है कि वर्ष 2027 तक जवाहर घाटी झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगी और हजारीबाग की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति देगी।
बता दें कि परियोजना को स्वीकृति दिलाने में बरही विधायक मनोज कुमार यादव की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
यह भी पढ़ें- आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम: कम लागत में ज्यादा तांबा निकालने के लिए HCL - NML मिलकर करेंगे रिसर्च