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    जमशेदपुर के बिक्रांत तिवारी ने खड़े किए 1.20 करोड़ पेड़, बनाया ₹100 करोड़ का सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 07:00 AM (IST)

    डॉ. बिक्रांत तिवारी ने 1.20 करोड़ पेड़ लगाकर ₹100 करोड़ का सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल खड़ा किया है, जो किसानों को स्थायी आय और पर्यावरण संरक्षण प्रदान करता ...और पढ़ें

    आदिवासी डॉट ओआरजी' और मड एंड मीडोज स्टार्टअप कंपनियों के संस्थापक व ग्लोबल सीईओ डॉ. बिक्रांत तिवारी।

    आदिवासी डॉट ओआरजी' और मड एंड मीडोज स्टार्टअप कंपनियों के संस्थापक व ग्लोबल सीईओ डॉ. बिक्रांत तिवारी।

    HighLights

    1. बिक्रांत तिवारी ने 1.20 करोड़ पेड़ लगाए, ₹100 करोड़ का मॉडल।

    2. बंजर जमीन पर आर्थिक पेड़ लगाकर किसानों को स्थायी आय।

    3. जियो-टैगिंग, कार्बन क्रेडिट से ग्रामीण पलायन रोकने में मदद।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। प्रकृति को बचाने की जरूरत नहीं है, बस उसे बर्बाद करना बंद कर दीजिए। यह संदेश है आईएमपीसीए (IMPCA), 'आदिवासी डॉट ओआरजी' और 'मड एंड मीडोज' जैसी प्रमुख स्टार्टअप कंपनियों के संस्थापक व ग्लोबल सीईओ डॉ. बिक्रांत तिवारी का। 
     
    TEDx जमशेदपुर कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे डॉ. बिक्रांत ने दैनिक जागरण से खास बातचीत में बताया कि पेड़ केवल पर्यावरण संरक्षण का जरिया नहीं, बल्कि किसानों और आदिवासी परिवारों के लिए स्थायी आय का एक बड़ा माध्यम बन सकते हैं।
     

    16 साल पहले की शुरुआत, अब ₹100 करोड़ का मॉडल

    जमशेदपुर में प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद डॉ. बिक्रांत तिवारी ने IIM कोलकाता और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

    वर्ष 2010 में उन्होंने पेड़ों को महज चैरिटी के बजाय एक प्रॉफिटेबल बिजनेस मॉडल के रूप में देखने की सोच के साथ काम शुरू किया।

    आज उनका यह स्टार्टअप ₹100 करोड़ के एक विशाल सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल में बदल चुका है। उनकी संस्था वर्तमान में टाटा मोटर्स सहित देश की कई बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के लिए कार्बन न्यूट्रैलिटी और बड़े पैमाने पर पौधारोपण के प्रोजेक्ट्स संचालित कर रही है।
     

    बंजर जमीन पर सागवान और शीशम

    डॉ. बिक्रांत की कंपनी आदिवासी और ग्रामीण किसानों की बंजर जमीनों को चिन्हित कर वहां आर्थिक महत्व वाले पौधे जैसे सागवान, साल और शीशम लगाती है।

    •     जियो-टैगिंग और कार्बन क्रेडिट: लगाए गए हर पौधे की जियो-टैगिंग की जाती है और उसे कार्बन क्रेडिट सिस्टम से जोड़ा जाता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिलता है।
    •     एक एकड़ से लाखों की कमाई: एक एकड़ जमीन में लगभग 100 सागवान के पेड़ लगाए जाते हैं। 20 वर्षों में ये पेड़ किसानों को ₹6 से ₹7 लाख तक की अनुमानित आय दे सकते हैं, जो कई पारंपरिक फसलों से कहीं अधिक है।
    •     पलायन पर लगाम: डॉ. बिक्रांत का मानना है कि आर्थिक असुरक्षा के कारण ग्रामीणों का पलायन होता है। यदि गांवों में पेड़ आधारित अर्थव्यवस्था विकसित हो, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और पलायन थमेगा।


    देशभर में फैला अभियान: 25 हजार से अधिक किसान जुड़े

    उनकी संस्था अब तक देश के कई राज्यों में व्यापक स्तर पर पौधारोपण अभियान चला चुकी है:

    • झारखंड: पटमदा और बोड़ाम क्षेत्र
    • अन्य राज्य: उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, नर्मदापुरम और ओडिशा का मयूरभंज
    इस पहल से अब तक 25,000 से अधिक किसान सीधे जुड़ चुके हैं और लाभान्वित हो रहे हैं।
     

    अनोखी पहल: जन्मदिन पर उपहार नहीं, लगाएं पेड़

    डॉ. बिक्रांत के स्टार्टअप ने एक अनूठी सेवा भी शुरू की है। अब लोग अपने या प्रियजनों के जन्मदिन और विशेष अवसरों पर उपहार देने के बजाय पेड़ लगवा सकते हैं। 
     
    संस्था संबंधित व्यक्ति के नाम से पेड़ लगाती है, उसकी जियो-टैगिंग के साथ डिजिटल प्रमाण पत्र जारी करती है और उस पेड़ की पूरी देखभाल की जिम्मेदारी भी खुद संभालती है।

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