जमशेदपुर के बिक्रांत तिवारी ने खड़े किए 1.20 करोड़ पेड़, बनाया ₹100 करोड़ का सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल
डॉ. बिक्रांत तिवारी ने 1.20 करोड़ पेड़ लगाकर ₹100 करोड़ का सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल खड़ा किया है, जो किसानों को स्थायी आय और पर्यावरण संरक्षण प्रदान करता ...और पढ़ें

आदिवासी डॉट ओआरजी' और मड एंड मीडोज स्टार्टअप कंपनियों के संस्थापक व ग्लोबल सीईओ डॉ. बिक्रांत तिवारी।
HighLights
बिक्रांत तिवारी ने 1.20 करोड़ पेड़ लगाए, ₹100 करोड़ का मॉडल।
बंजर जमीन पर आर्थिक पेड़ लगाकर किसानों को स्थायी आय।
जियो-टैगिंग, कार्बन क्रेडिट से ग्रामीण पलायन रोकने में मदद।
16 साल पहले की शुरुआत, अब ₹100 करोड़ का मॉडल
जमशेदपुर में प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद डॉ. बिक्रांत तिवारी ने IIM कोलकाता और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
वर्ष 2010 में उन्होंने पेड़ों को महज चैरिटी के बजाय एक प्रॉफिटेबल बिजनेस मॉडल के रूप में देखने की सोच के साथ काम शुरू किया।
बंजर जमीन पर सागवान और शीशम
डॉ. बिक्रांत की कंपनी आदिवासी और ग्रामीण किसानों की बंजर जमीनों को चिन्हित कर वहां आर्थिक महत्व वाले पौधे जैसे सागवान, साल और शीशम लगाती है।
- जियो-टैगिंग और कार्बन क्रेडिट: लगाए गए हर पौधे की जियो-टैगिंग की जाती है और उसे कार्बन क्रेडिट सिस्टम से जोड़ा जाता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिलता है।
- एक एकड़ से लाखों की कमाई: एक एकड़ जमीन में लगभग 100 सागवान के पेड़ लगाए जाते हैं। 20 वर्षों में ये पेड़ किसानों को ₹6 से ₹7 लाख तक की अनुमानित आय दे सकते हैं, जो कई पारंपरिक फसलों से कहीं अधिक है।
- पलायन पर लगाम: डॉ. बिक्रांत का मानना है कि आर्थिक असुरक्षा के कारण ग्रामीणों का पलायन होता है। यदि गांवों में पेड़ आधारित अर्थव्यवस्था विकसित हो, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और पलायन थमेगा।
देशभर में फैला अभियान: 25 हजार से अधिक किसान जुड़े
उनकी संस्था अब तक देश के कई राज्यों में व्यापक स्तर पर पौधारोपण अभियान चला चुकी है:
- झारखंड: पटमदा और बोड़ाम क्षेत्र
- अन्य राज्य: उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, नर्मदापुरम और ओडिशा का मयूरभंज