हाथियों के बसेरे में 'लग्जरी स्टे'! अब दलमा के जंगलों में AC कॉटेज और कैफे तैयार, लें कुदरत का असली आनंद
दलमा वन्यजीव अभयारण्य के मकुलाकोचा में 15 आधुनिक इको-कॉटेज का उद्घाटन रविवार को पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू करेंगे। ...और पढ़ें

दलमा में बने कॉटेज एसी, कैफेटेरिया और पार्किंग जैसी सुविधाओं से लैस हैं, जो पर्यटन को बढ़ावा देंगे और स्थानीय रोजगार सृजित करेंगे।
HighLights
एसी कमरे, कैफेटेरिया, पार्किंग जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं।
पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय रोजगार के अवसर।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के दलमा वन्यजीव अभयारण्य में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है।
मकुलाकोचा में नव-निर्मित 15 आधुनिक गेस्ट हाउस (ईको-कॉटेज) का भव्य उद्घाटन रविवार को राज्य के पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू करेंगे।
इस विशेष समारोह में केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ तथा ईचागढ़ की विधायक सविता महतो मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं नए कॉटेज
दलमा के डीएफओ (DFO) सबा आलम अंसारी ने बताया कि इस नई परियोजना के शुरू होने से दलमा आने वाले सैलानियों को ठहरने की विश्वस्तरीय और आरामदायक सुविधाएं मिलेंगी।
पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इन गेस्ट हाउसों में एसी (AC) कमरे, कैफेटेरिया, आकर्षक लॉन, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था, रंग-बिरंगे फव्वारे तथा स्वादिष्ट व मनपसंद भोजन का प्रबंध किया गया है।
पिंड्राबेड़ा में भी निर्माण कार्य अंतिम चरण में
प्राकृतिक वादियों के बीच बने इन कॉटेजों का रात्रिकालीन मनमोहक दृश्य पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा। डीएफओ के अनुसार, पिंड्राबेड़ा में भी 15 अतिरिक्त नए गेस्ट हाउसों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
दोनों परियोजनाएं पूर्ण होने के बाद दलमा अभयारण्य में पर्यटकों के ठहरने की क्षमता में काफी वृद्धि होगी। इससे न केवल स्थानीय पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
वहन क्षमता और पर्यावरण संतुलन का रखा गया ध्यान
डीएफओ सबा आलम अंसारी ने स्पष्ट किया कि ये 15 ईको-कॉटेज अनुमोदित वन्यजीव प्रबंधन योजना (2021-30) के तहत अभयारण्य के अधिसूचित पर्यटन क्षेत्र में ही विकसित किए गए हैं।
इनका मुख्य उद्देश्य विनियमित इको-टूरिज्म को प्रोत्साहित करना और ईको-विकास समितियों के सदस्यों के लिए आजीविका का स्थायी जरिया तैयार करना है।
कॉटेजों की संख्या दलमा की वहन क्षमता को ध्यान में रखकर निर्धारित की गई है, ताकि पर्यटन गतिविधियों के कारण वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।