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    एक जोड़ा उल्लू सालभर में बचाता है फसलों को, चूहों का शिकार कर बनाए रखता है संतुलन

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 12:52 AM (IST)

    अंतर्राष्ट्रीय उल्लू जागरूकता दिवस पर दलमा वन्यजीव अभयारण्य में उल्लू संरक्षण का आह्वान किया गया, जो पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और किसानों के लिए ...और पढ़ें

    दलमा वन्यजीव अभयारण्य: बायो-इंडिकेटर के रूप में उभरे उल्लू।

    दलमा वन्यजीव अभयारण्य: बायो-इंडिकेटर के रूप में उभरे उल्लू।

    HighLights

    1. दलमा में उल्लू संरक्षण हेतु व्यापक जागरूकता अभियान का आह्वान।

    2. उल्लू किसानों के मित्र, सालभर में 1000 से अधिक चूहे खाते।

    3. उल्लू पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण 'बायो-इंडिकेटर' हैं।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। अंतर्राष्ट्रीय उल्लू जागरूकता दिवस के अवसर पर दलमा वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के क्षेत्रों में उल्लुओं के संरक्षण एवं उनकी पारिस्थितिकीय भूमिका को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान का आह्वान किया गया। 
     
    इस वर्ष की विशेष थीम जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों, विशेषकर दलमा पहाड़ी श्रृंखला को उल्लुओं के लिए एक आदर्श और अनुकूल परिवेश बनाए रखने पर केंद्रित रही। 
     
    वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार दलमा की समृद्ध जैव विविधता, घने वन और प्राकृतिक वातावरण उल्लुओं के लिए एक अत्यंत सुरक्षित और प्राकृतिक आश्रय स्थल प्रदान करते हैं।
     
    दलमा के डीएफओ (DFO) सबा आलम अंसारी ने जानकारी देते हुए बताया कि अभयारण्य में विभिन्न प्रजातियों के उल्लू बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। 
     
    इनकी मौजूदगी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यहां का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पूरी तरह स्वस्थ है। उन्होंने दलमा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 85 गांवों के ग्रामीणों और ईको विकास समितियों से उल्लुओं के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय सहयोग देने की भावुक अपील की।
     

    पर्यावरण स्वास्थ्य के बायो-इंडिकेटर और किसानों के मित्र

    वाइल्डलाइफ बायोलाजिस्ट एवं कंजर्वेशनिस्ट प्रसेनजीत सरकार ने उल्लुओं के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उल्लू वास्तव में किसानों के सच्चे मित्र हैं। ये मुख्य रूप से चूहे, छछूंदर, बड़े कीड़े-मकोड़े और छोटे सांपों का शिकार करते हैं।

    विशेषज्ञ के अनुसार, उल्लुओं का एक जोड़ा वर्षभर में 1,000 से अधिक चूहों का शिकार कर सकता है, जिससे कृषि फसलों को होने वाले भारी नुकसान से बचाया जा सकता है। 
     
    यदि प्राकृतिक आवास में उल्लुओं की संख्या घटती है, तो चूहों की आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि होगी, जो फसलों और वनस्पतियों के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हो सकती है।
     
    अपनी ध्वनिरहित उड़ान और अत्यंत तीक्ष्ण दृष्टि के कारण उल्लू प्रकृति के सबसे कुशल रात्रिकालीन शिकारी माने जाते हैं। खाद्य श्रृंखला (Food Chain) में शीर्ष पर होने के कारण इन्हें 'कीस्टोन प्रजाति' और पर्यावरण स्वास्थ्य का 'बायो-इंडिकेटर' भी कहा जाता है।
     

    पारिस्थितिकी तंत्र में उल्लुओं का मुख्य योगदान:

    •     फसल सुरक्षा: फसलों को नष्ट करने वाले चूहों और कीटों की संख्या पर प्रभावी नियंत्रण रखते हैं।
    •     पर्यावरण संतुलन: जैव विविधता और प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला का संतुलन बनाए रखने में मददगार हैं।
    •     स्वास्थ्य संकेतक: स्वस्थ एवं संतुलित वन पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख संकेतक माने जाते हैं।
    •     कीट नियंत्रण: हानिकारक कीटों और जीवों को खाकर बीमारियों के प्रसार को रोकते हैं।

    दलमा में कई दुर्लभ प्रजातियों के उल्लू मौजूद हैं। दलमा के आसपास स्थित 85 गांवों के ग्रामीणों और ईको विकास समितियों से इनके संरक्षण में सहयोग की अपील की गई है। दलमा में उल्लुओं की भरपूर मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यहाँ की खाद्य श्रृंखला और जैव विविधता पूरी तरह स्वस्थ एवं संतुलित है।

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     सबा आलम अंसारी, डीएफओ, दलमा वन्यजीव अभयारण्य