एक जोड़ा उल्लू सालभर में बचाता है फसलों को, चूहों का शिकार कर बनाए रखता है संतुलन
अंतर्राष्ट्रीय उल्लू जागरूकता दिवस पर दलमा वन्यजीव अभयारण्य में उल्लू संरक्षण का आह्वान किया गया, जो पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और किसानों के लिए ...और पढ़ें

दलमा वन्यजीव अभयारण्य: बायो-इंडिकेटर के रूप में उभरे उल्लू।
HighLights
दलमा में उल्लू संरक्षण हेतु व्यापक जागरूकता अभियान का आह्वान।
उल्लू किसानों के मित्र, सालभर में 1000 से अधिक चूहे खाते।
उल्लू पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण 'बायो-इंडिकेटर' हैं।
पर्यावरण स्वास्थ्य के बायो-इंडिकेटर और किसानों के मित्र
वाइल्डलाइफ बायोलाजिस्ट एवं कंजर्वेशनिस्ट प्रसेनजीत सरकार ने उल्लुओं के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उल्लू वास्तव में किसानों के सच्चे मित्र हैं। ये मुख्य रूप से चूहे, छछूंदर, बड़े कीड़े-मकोड़े और छोटे सांपों का शिकार करते हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र में उल्लुओं का मुख्य योगदान:
- फसल सुरक्षा: फसलों को नष्ट करने वाले चूहों और कीटों की संख्या पर प्रभावी नियंत्रण रखते हैं।
- पर्यावरण संतुलन: जैव विविधता और प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला का संतुलन बनाए रखने में मददगार हैं।
- स्वास्थ्य संकेतक: स्वस्थ एवं संतुलित वन पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख संकेतक माने जाते हैं।
- कीट नियंत्रण: हानिकारक कीटों और जीवों को खाकर बीमारियों के प्रसार को रोकते हैं।
दलमा में कई दुर्लभ प्रजातियों के उल्लू मौजूद हैं। दलमा के आसपास स्थित 85 गांवों के ग्रामीणों और ईको विकास समितियों से इनके संरक्षण में सहयोग की अपील की गई है। दलमा में उल्लुओं की भरपूर मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यहाँ की खाद्य श्रृंखला और जैव विविधता पूरी तरह स्वस्थ एवं संतुलित है।
सबा आलम अंसारी, डीएफओ, दलमा वन्यजीव अभयारण्य