यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 08, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बीमारी से हैं परेशान और ऑपरेशन के नहीं है पैसे? तो यह है आपके काम की खबर, यहां फ्री में हो रहा महंगे से महंगा इलाज
अगर आप किसी बीमारी से परेशान है और इलाज या ऑपरेशन कराने के पैसे नहीं है तो आप सीधे जमशेदपुर के डिमना रोड स्थित गंगा मेमोरियल अस्पताल चले आए। यहां डा. ...और पढ़ें

HighLights
- डा. नागेंद्र सिंह अभी तक साढ़े पंद्रह हजार से अधिक निशुल्क सर्जरी कर चुके हैं।
- फ्री में इलाज का लाभ कोई भी आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति उठा सकता है।
- मां की याद मे हर साल शिविर लगाकर डा. नागेंद्र करते हैं गरीबों की सेवा।
जासं, जमशेदपुर। अगर आप गरीब हैं और इलाज कराने की राशि नहीं है तो चिंता नहीं करें। आप सीधे डिमना रोड स्थित गंगा मेमोरियल अस्पताल चले आएं। यहां गरीबों के लिए अगले दो माह तक शिविर लगाकर उनकी सर्जरी की जाएगी। पांच मरीजों की सर्जरी से शिविर की शुरुआत की गई।
गंगा हॉस्पिटल में मरीजों को राहत
कपाली निवासी सापिया खातून नौकरानी का काम करती है। उसके पति का निधन हो चुका है। महिला के ओवरी में तीन किलो का ट्यूमर था। दर्द से परेशान थी। उसके ऑपरेशन में लगभग एक लाख रुपये खर्च होने के कारण वह भटक रही थी। इसी बीच, उसे मुफ्त सर्जरी होने की जानकारी मिली, तो वह गंगा हाॅस्पिटल आई और अब उसकी सर्जरी हो पाई।
ओवरी में ट्यूमर का सफल ऑपरेशन
पटमदा निवासी भासो टुडू,मधुसुधन गोराई व भुइयांडीह निवासी नवीन मिश्रा का हाइड्रोसिल का ऑपरेशन किया गया। नवीन मिश्रा बिहार के समस्तीपुर से आपरेशन कराने आए हैं। वहीं, पटमदा निवासी पुष्पा सहिस दिव्यांग है। वह न तो बोल पाती है और न ही सुन पाती है। उसके ओवरी में ट्यूमर था, जिसका ऑपरेशन किया गया।
अब तक फ्री में कर चुके हैं हजारों सर्जरी
डा. नागेंद्र सिंह ने कहा कि हर साल वह अपनी मां की याद में दो माह तक शिविर लगाकर मरीजों की निशुल्क सर्जरी करते हैं। सिर्फ जांच व दवा पर मामूली खर्च आता है, जो मरीजों को देना होता है। इस बार उन्होंने 427 मरीजों की सर्जरी करने का लक्ष्य रखा है।
खबरें और भी
इसका लाभ कोई भी गरीब मरीज उठा सकता है। इसमें पीत के थैली में पत्थर, एपेंडिक्स, हार्निया, ओवरी का ट्यूमर, शरीर के ऊपरी भाग में किसी तरह का ट्यूमर सहित अन्य रोगी शामिल हो सकते हैं। डा. नागेंद्र सिंह अभी तक साढ़े पंद्रह हजार से अधिक निशुल्क सर्जरी कर चुके हैं।