पूर्वी सिंहभूम के +2 स्कूलों में बढ़ीं रैगिंग व मारपीट की घटनाएं, DEO बोलीं- गठित होगा एंटी रैगिंग सेल
नई शिक्षा नीति के तहत डिग्री कॉलेजों से इंटरमीडिएट की पढ़ाई +2 स्कूलों में स्थानांतरित होने के बाद पूर्वी सिंहभूम में रैगिंग और मारपीट की घटनाएं बढ़ ग ...और पढ़ें

स्कूलों में रैगिंग, छात्र-छात्राओं के बीच मारपीट और अनुशासनहीनता की घटनाएं सामने आने लगी हैं।
HighLights
शिक्षकों के अधिकार सीमित होने से अनुशासन बनाए रखना मुश्किल।
शिक्षा विभाग +2 स्कूलों में एंटी रैगिंग सेल बनाएगा।
अनुशासन बनाए रखने में बेबस दिख रहे शिक्षक
डिग्री कॉलेजों की तर्ज पर स्कूलों में भी बने एंटी रैगिंग सेल
हाल की 4 प्रमुख घटनाएं जो बढ़ा रही हैं चिंता
- केस 1 (नवोदय विद्यालय में जूनियर से बर्बरता): जवाहर नवोदय विद्यालय, बहरागोड़ा के हॉस्टल में सीनियर छात्र ने रात 11:30 बजे एक जूनियर छात्र के साथ मारपीट की और जबरन उसके मुंह में बीड़ी डालकर पीने पर मजबूर किया। आरोपी ने उसे रोजाना बीड़ी-सिगरेट पीने की हिदायत भी दी। जांच में घटना की पुष्टि होने से आवासीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
- केस 2 (KGBV में प्रताड़ना का आरोप): कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (धालभूमगढ़) की वार्डन चंपा बेसरा पर एक छात्रा को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। प्रताड़ना से सहमी छात्रा ने स्कूल जाना छोड़ दिया है, जिसके बाद परिजनों ने उपायुक्त (DC) से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- केस 3 (स्कूल गेट पर बाहरी युवकों से हिंसक झड़प): चाकुलिया के मनोहर लाल +2 उच्च विद्यालय में बैग गिराने के मामूली विवाद पर 12वीं के छात्र ने अपने 10-15 बाहरी दोस्तों को बुला लिया। छुट्टी के वक्त गेट पर लोहे के कड़े से हमला कर एक छात्र को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई शुरू की है।
- केस 4 (केंद्रीय विद्यालय की क्लास में घुसकर हमला): मुसाबनी स्थित केंद्रीय विद्यालय में छात्राओं के आपसी विवाद के बाद एक छात्रा की मां सीधे 11वीं विज्ञान की कक्षा में घुस गईं और दूसरी छात्रा के साथ मारपीट कर उसे घायल कर दिया। मामले की शिकायत मुसाबनी थाने तक पहुंची थी।
आज बच्चों में तनाव, आक्रोश और गाली-गलौज की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। उनमें अनुशासन और संस्कार का भाव कमजोर हो रहा है। अभिभावकों और शिक्षकों को समय रहते बच्चों के व्यवहार पर गंभीरता से ध्यान देना होगा, वरना आने वाले दिनों में यह हिंसा और भयावह रूप ले सकती है।
प्रो. मित्रेश्वर, शिक्षाविद
छोटी सी उम्र में आपसी दुश्मनी और मारपीट की घटनाएं बहुत अफसोसनाक हैं। इसके लिए शिक्षक व अभिभावक तो जिम्मेदार हैं ही, साथ ही मोबाइल का अत्यधिक व गलत इस्तेमाल आग में घी डालने का काम कर रहा है। समाज को मिलकर इसका हल खोजना होगा।
प्रो. इंदल पासवान, अभिभावक
छात्रों के बीच मारपीट व रैगिंग की बढ़ती घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। इस संबंध में स्कूलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब समय आ गया है कि प्लस टू स्कूलों में भी अनिवार्य रूप से एंटी रैगिंग सेल का गठन किया जाए। विभाग इस दिशा में पूरी तरह गंभीर है।
निशु कुमारी, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), पूर्वी सिंहभूम