ISL संकट: करोड़ों की फिजूलखर्ची में डूबे बड़े क्लब, समझदारी ने जमशेदपुर एफसी को बचाया
इंडियन सुपर लीग में बड़े फुटबॉल क्लबों को भारी वित्तीय घाटे का सामना करना पड़ रहा है। सैलरी कैप का उल्लंघन कर खिलाड़ियों पर अंधाधुंध खर्च करने के बाद, ...और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
बड़े ISL क्लबों ने सैलरी कैप का उल्लंघन कर भारी खर्च किया।
जमशेदपुर एफसी ने वित्तीय अनुशासन से खुद को संकट से बचाया।
खिलाड़ी वेतन कटौती के खिलाफ, अनुबंध का सम्मान चाहते हैं।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। 14 फरवरी से इंडियन सुपर लीग (ISL) के मैदान पर फुटबॉल की वापसी तो हो रही है, लेकिन पर्दे के पीछे भारतीय फुटबॉल की आर्थिक नींव बुरी तरह चरमरा गई है। एक ओर जहां लीग के बड़े क्लब भारी वित्तीय घाटे के कारण अपने ही खिलाड़ियों से वेतन में कटौती (Salary Cut) की गुहार लगा रहे हैं, वहीं जमशेदपुर एफसी (JFC) ने अपनी वित्तीय सूझबूझ से एक मिसाल पेश की है।
दिखावे की होड़ और बजट का उल्लंघन
क्लबों का नुकसान, एआइएफएफ का मुनाफा?
इसके बावजूद, क्लबों पर वित्तीय बोझ कम नहीं हुआ है। प्रत्येक क्लब को एआइएफएफ (AIFF) को 1 करोड़ रुपये की फ्रेंचाइजी फीस देनी है।
लीग के संचालन के लिए क्लबों को सामूहिक रूप से 14.56 करोड़ रुपये का योगदान देना होगा। हैरानी की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में एआइएफएफ अपना खर्च निकालकर मुनाफे में रहेगा, जबकि सारा जोखिम क्लबों और खिलाड़ियों के सिर होगा।