भारतीय फुटबॉल की 'नर्सरी' पर संकट: JFC बंद होने से अधर में लटकी TFA, खत्म हुआ ISL में एंट्री का सीधा रास्ता
टाटा स्टील के जमशेदपुर एफसी बंद करने के फैसले से न केवल वर्तमान खिलाड़ी बल्कि टाटा फुटबॉल अकादमी (टीएफए) का भविष्य भी अधर में लटक गया है। ...और पढ़ें

भारतीय फुटबाल की नर्सरी कहे जाने वाले टीएफए संस्थान के प्रशिक्षुओं के सामने अब करियर को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
HighLights
ऐतिहासिक टाटा फुटबॉल अकादमी (टीएफए) का भविष्य अब अनिश्चित।
युवा खिलाड़ियों के पेशेवर फुटबॉल करियर के रास्ते हुए बंद।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील द्वारा जमशेदपुर एफसी (JFC) को बंद करने के फैसले ने न केवल वर्तमान खिलाड़ियों को स्तब्ध किया है, बल्कि भविष्य की खेल प्रतिभाओं के सपनों पर भी पानी फेर दिया है।
इस कड़े फैसले से 1987 में स्थापित देश की सबसे प्रतिष्ठित टाटा फुटबॉल अकादमी (टीएफए) का भविष्य पूरी तरह से अधर में लटक गया है।
भारतीय फुटबॉल की ‘नर्सरी’ कहे जाने वाले इस ऐतिहासिक संस्थान के प्रशिक्षुओं के सामने अब अपने करियर को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
टीएफए कैडेट्स का लांचिंग पैड थी जेएफसी
पिछले कुछ वर्षों से जेएफसी, टीएफए कैडेट्स के लिए एक बेहतरीन ‘लांचिंग पैड’ का काम कर रही थी। अकादमी में तैयार होने वाले युवा खिलाड़ियों को जेएफसी की रिजर्व टीम और यूथ विंग के जरिए सीधे इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) जैसी देश की शीर्ष लीग में प्रवेश मिल जाता था।
अब जेएफसी और उसकी सभी खेल इकाइयों के बंद होने से, इन युवा खिलाड़ियों के पास अपनी प्रतिभा दिखाने का कोई सीधा कॉर्पोरेट मंच नहीं बचा है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से लौहनगरी और आसपास के क्षेत्रों में फुटबॉल का विकास कई दशक पीछे चला जाएगा।
दिग्गज खिलाड़ियों की खान रहा है टीएफए
टीएफए का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। इस अकादमी ने भारतीय राष्ट्रीय टीम को कई दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया।
भारतीय फुटबॉल के सुनहरे पन्नों में दर्ज कार्लटन चैपमैन, रेनेडी सिंह, सुब्रत पाल, दीपक मंडल, महेश गवली, प्रणय हलधर, गौरमांगी सिंह, सुभाशीष राय चौधरी और फारुख चौधरी जैसे दर्जनों नामी खिलाड़ी इसी अकादमी की देन हैं।
ग्रामीण व आदिवासी युवाओं के टूटे सपने
झारखंड के सुदूर आदिवासी इलाकों और देश भर से चुनकर टीएफए आने वाले बच्चे यहां से सीधे आईएसएल और राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनने का सपना देखते थे।
जेएफसी के अचानक बंद होने से उनके लिए पेशेवर फुटबॉल में जाने का यह सीधा और सुरक्षित रास्ता बंद हो गया है। एक सशक्त कॉर्पोरेट क्लब के अभाव में, भारतीय फुटबॉल को अनगिनत सितारे देने वाली इस ऐतिहासिक अकादमी की चमक भी अब फीकी पड़ने की आशंका गहरा गई है।