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    चैत्र नवरात्रि की महानवमी पर भक्ति के रंग में रंगा जमशेदपुर, जावरा पूजा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

    By Nirmal PrasadEdited By: Shashank Baranwal
    Updated: Fri, 27 Mar 2026 11:10 AM (IST)

    चैत्र नवरात्र की महानवमी पर जमशेदपुर भक्तिमय हो उठा। सोनारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में जवारा पूजा का आयोजन हुआ, जिसमें 71 अखंड ज्योत प्रज्वलित किए गए। ...और पढ़ें

    HighLights

    1. महानवमी पर जमशेदपुर में जवारा पूजा का भव्य आयोजन।

    2. सोनारी में 71 अखंड ज्योत, मनबोध बस्ती में पहली बार।

    3. भक्तिमय शोभायात्रा के साथ स्वर्णरेखा घाट पर विसर्जन।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। चैत्र नवरात्र की महानवमी के अवसर पर शुक्रवार सुबह पूरा शहर भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। सोनारी सहित टुईलाडूंगरी, गढ़ाबासा, बागुनहातु और बागबेड़ा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक जवारा पूजा का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया।

    नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में माता के नौ रूपों की विधिवत पूजा की जाती है। पहले दिन अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाती है, जिसकी पूरे नौ दिनों तक सेवा की जाती है।

    इसके साथ ही हरियाली के प्रतीक के रूप में बिजोना बोया जाता है, जिसे छत्तीसगढ़ी समाज में ‘भोजली’ कहा जाता है। आठ दिनों तक पूजा-अर्चना और सुबह-शाम की आरती के बाद महानवमी के दिन भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।

    शुक्रवार सुबह सोनारी स्थित श्री श्री सार्वजनिक उपकार संघ द्वारा आयोजित जवारा पूजा में 71 अखंड ज्योत प्रज्वलित किए गए थे। महिलाएं सिर पर अखंड ज्योत और भोजली लेकर कपाली स्थित स्वर्णरेखा घाट के लिए रवाना हुईं।

    Jamshedpur Puja

    शोभायात्रा में माता की विशाल प्रतिमाएं ट्रकों पर सुसज्जित थीं। आगे-आगे श्रद्धालु जस गीतों की धुन पर नाचते-गाते चल रहे थे, जबकि पीछे महिलाएं सिर पर अखंड ज्योत लेकर भक्ति भाव से आगे बढ़ रही थीं।

    पूरा वातावरण भक्ति और उत्साह से सराबोर हो गया। नदी घाट पर पहुंचने के बाद बैगा और पंडा द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना की गई और अखंड ज्योत तथा भोजली का विसर्जन किया गया।

    मनबोध बस्ती में पहली बार आयोजन

    सोनारी स्थित मनबोध बस्ती में इस वर्ष पहली बार जवारा पूजा का आयोजन किया गया। श्री श्री सार्वजनिक मां भवानी जवारा पूजा समिति द्वारा 6 अखंड ज्योत प्रज्वलित किए गए थे। शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे समिति के सदस्य कपाली घाट पहुंचे, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद विसर्जन संपन्न हुआ।

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