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    टुसू की विदाई और मकर की डुबकी में घुले लोक-संस्कृति के अनूठे रंग, जमशेदपुर में चौड़ल और मुर्गा लड़ाई का दिखा रोमांच

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 10:20 PM (IST)

    जमशेदपुर में मकर संक्रांति और टुसू पर्व पर स्वर्णरेखा-खरकई संगम सहित विभिन्न घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। उदया तिथि के कारण पर् ...और पढ़ें

    बुधवार को सोनारी दोमुहानी में आयोजित मकर मेला में उमड़ी लोगों की भीड़।

    बुधवार को सोनारी दोमुहानी में आयोजित मकर मेला में उमड़ी लोगों की भीड़।

    HighLights

    1. हजारों श्रद्धालुओं ने स्वर्णरेखा-खरकई संगम पर पुण्य की डुबकी लगाई।

    2. उदया तिथि के कारण पर्व का उल्लास 48 घंटे तक रहेगा।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर में बुधवार को मकर संक्रांति और टुसू पर्व पर स्वर्णरेखा और खरकई नदी के संगम समेत तमाम घाटों पर भोर होते ही हजारों लोगों ने पुण्य की डुबकी लगाई। उदया तिथि के मान से इस बार पर्व का उल्लास 48 घंटों तक बना रहेगा, जिसके चलते गुरुवार को भी शहर में उत्सव का माहौल रहेगा।  

    घाटों पर आस्था का संगम: स्वर्णरेखा हुई 'स्वर्णमयी' 

    बुधवार की सुबह नदी के ऊपर कोहरे की झीनी चादर लिपटी हुई थी, लेकिन जैसे ही सूर्य की पहली किरण स्वर्णरेखा के पानी पर पड़ी, नदी का जल सचमुच सोने जैसा चमकने लगा। 

    प्रमुख घाटों का नजारा

    •     दोमुहानी (सोनारी): यहां स्वर्णरेखा और खरकई का संगम स्थल श्रद्धा का मुख्य केंद्र रहा।
    •     बड़ौदा घाट (बागुबेड़ा): यहां सुबह 4 बजे से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं।
    •     मानगो और बेली बोधनवाला घाट: इन घाटों पर भी तिल रखने की जगह नहीं थी। 
    स्नान के बाद भक्तों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया और सुख-समृद्धि की कामना की। घाटों पर बज रहे शंख और पुरोहितों के मंत्रोच्चार ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।  

     





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    सोनारी दोमुहानी लोक नृत्य प्रस्‍तुत करतीं युवतियां।

    टुसू पर्व: लोक-संस्कृति के सतरंगी रंगों में डूबी लौहनगरी 

    जमशेदपुर का 'इस्पाती शोर' बुधवार को मांदर की थाप और टुसू गीतों की मिठास में खो गया। झारखंड की माटी से जुड़ा टुसू पर्व यहां की सांस्कृतिक पहचान बनकर उभरा।  

    भव्य चौड़ल और विसर्जन 

    बांस की खपचियों और रंगीन कागजों से बने ऊंचे-ऊंचे भव्य 'चौड़ल' (पिरामिडनुमा ढांचे) जब घाटों की ओर बढ़े, तो ऐसा लगा मानो सतरंगी मीनारें चल रही हों।
     
    आदिवासी और मूलवासी समाज की महिलाओं ने 'टुसू मनी' को गीत गाते हुए विदाई दी। युवतियों के कंठ से फूटते टुसू गीत अच्छी फसल और खुशहाल जीवन की प्रार्थना कर रहे थे।  

    मुर्गा लड़ाई का रोमांच 

    परंपरा के अनुसार, दोमुहानी और बाबूडीह घाट पर पारंपरिक मुर्गा लड़ाई का आयोजन हुआ। इसे देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी। यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि ग्रामीण पौरुष और पुरानी परंपराओं के प्रति जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।  

    घाट से घर तक: खान-पान और रिश्तों की मिठास 

    नदी तटों से शुरू हुआ उत्सव दोपहर होते-होते घरों तक पहुंच गया। जमशेदपुर वासियों ने पारंपरिक रूप से दही-चूड़ा और गुड़ का आनंद लिया। शाम होते ही तिलकुट, तिल के लड्डू और गुड़-पीठा की मिठास ने रिश्तों में गर्माहट भर दी। छतों पर पतंगबाजी का दौर चला और पार्कों में लोगों ने पिकनिक का लुत्फ उठाया।  
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    बुधवार को सोनारी दोमुहानी में विजेता को पुरस्‍कार देकर सम्‍मानित करते सांसद बिद्युत बरण महतो।

    दोमुहानी संगम पर भव्य टुसू मेला: दिग्गजों का जमावड़ा 

    झारखंड सांस्कृतिक कला केंद्र द्वारा दोमुहानी संगम पर भव्य टुसू मेले का आयोजन किया गया। इस मौके पर शहर के कई राजनीतिक और सामाजिक दिग्गज शामिल हुए।

    सांसद बिद्युत बरण महतो ने कहा कि मकर और टुसू पर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान है। इसे संजोए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, अन्यथा हम अपनी जड़ें खो देंगे।

    विधायक सरयू राय ने दोमुहानी संगम स्थल को एक अद्वितीय और ऐतिहासिक स्थल बताते हुए इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्‍होंने कहा क‍ि टुसू यहां की परंपरा है। कार्यक्रम में पूर्व सांसद सुमन महतो, कुणाल षाडंगी, हिदायतुल्ला खान, मोहन कर्मकार समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। 

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    प्रतियोगिता और पुरस्कार: कला का सम्मान 

    मेले के दौरान सात पूजा समितियों ने अपनी टुसू प्रतिमाओं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ प्रदर्शन किया। इस दौरान बेहतरीन चौड़ल और प्रतिमा निर्माण के लिए विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया।
    ज्योतिष गणना और उदया तिथि को मानने वाले लोग गुरुवार को भी दान-पुण्य और स्नान करेंगे। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का दौर जारी रहेगा। बाजारों में तिलकुट और खिचड़ी की सामग्रियों की बिक्री के लिए अभी भी भारी भीड़ देखी जा रही है।  

    ये रहे विजेता 

    • स्थान     विजेता का नाम     क्षेत्र         पुरस्कार राशि
    • प्रथम     जगन्नाथ महतो     राजनगर     35,000
    • द्वितीय    धनंजय महतो     पदपसाई     30,000
    • तृतीय     सोहरी महतो      राजनगर     25,000
    • चतुर्थ      राजेश             घाटशिला    21,000
    • पंचम      डॉ. गोराई        उज्जवलपुर   15,000
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    मकर संक्रांति के उपलक्ष्‍य में सोनारी दोमुहानी पर उमड़ी लोगों की भीड़।