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    20 वर्षों का अनुभव व आइआइएम से ट्रेनिंग: जमशेदपुर की प्रधानाध्यापिका रंजीता गांधी नेशनल अवॉर्ड को शॉर्टलिस्ट

    By Ch Rao Edited By: Sanjeev Kumar
    Updated: Wed, 05 Aug 2026 09:30 PM (IST)

    जमशेदपुर के बीपीएम बर्मामाइंस सीएम उत्कृष्ट विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रंजीता गांधी को वर्ष 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए झारखंड से अनुशंस ...और पढ़ें

    रंजीता गांधी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा झींकपानी डीएवी पब्लिक स्कूल से प्राप्त की तथा कटक के रेवेंसा कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की।

    रंजीता गांधी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा झींकपानी डीएवी पब्लिक स्कूल से प्राप्त की तथा कटक के रेवेंसा कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की।

    HighLights

    1. विद्यालय को सीबीएसई संबद्धता और गोल्ड ग्रेड दिलाया।

    2. छात्रों ने शिक्षा, खेल, संगीत में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

    जासं, जमशेदपुर। जमशेदपुर के मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय बीपीएम बर्मामाइंस की प्रधानाध्यापिका रंजीता गांधी का नाम वर्ष 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए झारखंड राज्य से अनुशंसित किया गया है। 
     
    राज्य स्तरीय चयन समिति की ओर से मिली यह अनुशंसा उनकी दो दशक लंबी शिक्षण यात्रा, विद्यालय में किए गए शैक्षणिक नवाचारों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का परिणाम मानी जा रही है। 
     

    शिक्षा और नेतृत्व विकास का समृद्ध अनुभव 

    रंजीता गांधी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा झींकपानी डीएवी पब्लिक स्कूल से प्राप्त की तथा कटक के रेवेंसा कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की।
     
    वह भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रांची, कोलकाता और अहमदाबाद से एजुकेशन इन लीडरशिप कार्यक्रम की पूर्व छात्रा रही हैं। 
     
    जहां से उन्होंने नेतृत्व विकास का विशेष प्रशिक्षण लिया। इसके अलावा उन्होंने एनआईबीएम (NIBM), चेन्नई से एक वर्षीय एग्जीक्यूटिव एमबीए की डिग्री भी हासिल की है।
     

    प्राइवेट स्कूलों का अनुभव और सरकारी स्कूल तक का सफर 

    रंजीता गांधी ने वर्ष 2001 से 2012 तक जमशेदपुर के कई प्रतिष्ठित सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध निजी विद्यालयों में अध्यापन कार्य किया। 
     
    उन्होंने जमशेदपुर पब्लिक स्कूल (JPS), केरला समाजम मॉडल स्कूल (KSMS), लोयोला और बेल्डीह चर्च जैसे नामचीन स्कूलों में अध्यापन किया।  
     
    वर्ष 2012 में उनकी पहली सरकारी नियुक्ति बीपीएम बर्मामाइंस हाईस्कूल में अर्थशास्त्र (Economics) की शिक्षिका के रूप में हुई। इसके बाद वर्ष 2021 में विद्यालय के मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय बनने पर उन्हें प्रधानाध्यापिका की कमान सौंपी गई।  
     

    सीबीएसई संबद्धता और क्वालिटी में गोल्ड ग्रेड 

    प्रधानाध्यापिका का पद संभालने के बाद रंजीता गांधी ने बीपीएम प्लस टू विद्यालय का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया। उनके कुशल नेतृत्व में विद्यालय को जैक बोर्ड (JAC) से हटाकर सीबीएसई (CBSE) से संबद्धता दिलाई गई। 
     
    यही नहीं, विद्यालय ने गुणवत्ता मूल्यांकन में अपनी पहली ही कोशिश में गोल्ड ग्रेड हासिल कर राज्यभर में एक नई मिसाल पेश की।
     

    प्रॉब्लम बेस्ड लर्निंग और ऑनलाइन डाउट क्लास

    उन्होंने शिक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए प्रॉब्लम बेस्ड लर्निंग मॉडल लागू किया। नियमित कक्षाओं के साथ-साथ सप्ताह में तीन से चार अतिरिक्त ऑनलाइन डाउट सेशन आयोजित किए जाते हैं। 

    जूम (Zoom) प्लेटफॉर्म के माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाता है। कोरोना काल में शुरू की गई यह पहल आज भी जारी है। 
     
    प्रशासनिक व्यस्तताओं के बावजूद उनके मार्गदर्शन और विषय (अर्थशास्त्र) में विद्यालय का परीक्षा परिणाम लगातार 100% रहा है।
     

    खेल, संगीत और प्रतियोगी परीक्षाओं में अव्वल छात्र

    उनके मार्गदर्शन में स्कूल के छात्रों ने हर क्षेत्र में सफलता का परचम लहराया है:
     
    • उच्च शिक्षा: वर्ष 2025 में एक छात्र का चयन बीआईटी सिंदरी (BIT Sindri) में हुआ, जबकि इस वर्ष एक विद्यार्थी की काउंसलिंग एनआईटी (NIT) में जारी है। 
    • प्रतिभा: छात्र अयंक राज ने एक पुस्तक लिखकर उसे अमेजन पर प्रकाशित कराया है। 
    • प्रतियोगी परीक्षा: कई छात्रों ने एमबीए (MBA) प्रवेश परीक्षा और कंपनी सेक्रेटरी (CS) की परीक्षा में सफलता पाई है। 
    • खेल व संगीत: विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी और योग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। खेलो झारखंड में स्कूल को शतरंज में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का सम्मान मिला, वहीं एक छात्र संगीत में स्नातक की पढ़ाई कर रहा है।

     विद्यालय केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और प्रतिभा के समग्र विकास का केंद्र बनना चाहिए। हमने इसी सोच के साथ काम किया और सभी के सहयोग से यह सफलता संभव हो सकी।

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