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    वर्कर्स कॉलेज में वित्तीय हेराफेरी; बिना JAC अनुमति के निजी बैंक में ₹1.50 करोड़ FD करने पर हंगामा

    By Ch Rao Edited By: Sanjeev Kumar
    Updated: Tue, 23 Jun 2026 01:13 AM (GMT+05:30)

    जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज ₹1.50 करोड़ की JAC राशि को बिना अनुमति निजी बैंक में FD करने के विवाद में घिर गया है। युवा जदयू ने कॉलेज प्रबंधन पर वित्तीय हेर ...और पढ़ें

    जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज।

    जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज।

    HighLights

    1. बिना अनुमति निजी बैंक में जमा करने पर आरोप।

    2. युवा जदयू ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

    जासं, जमशेदपुर। जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज एक बड़े विवाद में घिर गया है। कॉलेज में बची झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की ₹1.50 करोड़ की राशि को कथित तौर पर बिना अनुमति के एक निजी बैंक में फिक्स डिपॉजिट (FD) कर दिया गया है। 
     
    नियमों को ताक पर रखकर किए गए इस कार्य को लेकर युवा जदयू ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर वित्तीय हेराफेरी के आरोप लगाए हैं।
     

    पूर्व छात्र नेता ने JAC और शिक्षा विभाग को लिखा पत्र 

    इस मामले को लेकर युवा जदयू के कोल्हान अध्यक्ष सह पूर्व छात्र नेता हेमंत पाठक ने जैक (JAC) के अध्यक्ष और सचिव को शिकायत पत्र भेजा है।

    इसकी प्रतिलिपि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव और जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को भी भेजी गई है।

    पत्र में हेमंत पाठक ने उल्लेख किया है कि पूरे झारखंड के डिग्री महाविद्यालयों में अब इंटरमीडिएट (प्लस टू) की पढ़ाई बंद हो चुकी है।
     
    इसके चलते हर कॉलेज के पास करोड़ों रुपए का फंड जमा है, जिस पर विश्वविद्यालय और कॉलेज दोनों की नजरें हैं। 
     

    निजी बैंक में FD और व्यक्तिगत लाभ के आरोप 

    कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलसचिव (Registrar) ने भी सभी कॉलेजों से इस खाते में उपलब्ध राशि का ब्योरा मांगा है।हेमंत पाठक ने आरोप लगाया कि जहां अन्य कॉलेज इस फंड को लेकर अब भी जैक (JAC) के दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं।
     
    वहीं वर्कर्स कॉलेज ने नियमों की अनदेखी कर ₹1.50 करोड़ की भारी-भरकम राशि को एचडीएफसी (HDFC) बैंक में फिक्स कर दिया।
     

    पत्र में उठाए गए गंभीर सवाल  

    एक सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थान की इतनी बड़ी राशि को बिना उच्च अधिकारियों की अनुमति के किसी निजी बैंक में कैसे फिक्स किया जा सकता है? क्या इस वित्तीय कदम के बदले कॉलेज के प्राचार्य (प्रिंसिपल) को कोई व्यक्तिगत लाभ पहुंचाया गया है? 

    प्राचार्य की योग्यता पर भी उठाए सवाल 

    इसके अलावा, हेमंत पाठक ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को एक और पत्र भेजकर वर्कर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजीव कुमार की योग्यता पर सवाल उठाए हैं। 
     
    उन्होंने कहा कि जब वर्कर्स कॉलेज से साइंस (विज्ञान) की पढ़ाई को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, तो फिजिक्स (भौतिकी) के शिक्षक डॉ. राजीव कुमार वहां के प्रिंसिपल पद पर कैसे बने रह सकते हैं?


    युवा जदयू ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।