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    झारखंड को मिलेगी पहली महिला जेल, कैदी से लेकर पुलिस प्रशासन तक सब महिलाएं

    Updated: Wed, 10 Jun 2026 08:03 AM (GMT+05:30)

    पूर्वी सिंहभूम के साकची कारा को झारखंड का पहला पूर्णतः महिला कारा बनाने की तैयारी शुरू हो गई है, जिसके लिए जेल आईजी ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है। ...और पढ़ें

    साकची में बनेगी प्रदेश की पहली महिला जेल। एआई जनरेटेड फोटो

    साकची में बनेगी प्रदेश की पहली महिला जेल। एआई जनरेटेड फोटो

    HighLights

    1. साकची कारा को पूर्णतः महिला जेल बनाने का प्रस्ताव।

    2. महिला बंदियों के लिए विशेष सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा सुविधाएं।

    3. पुनर्वास और कौशल विकास पर रहेगा विशेष ध्यान।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले स्थित साकची कारा को झारखंड का पहला पूर्णतः महिला कारा बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में जेल आइजी सुदर्शन प्रसाद ने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है।

    प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेशभर की सजायाफ्ता महिला बंदियों को इसी जेल में रखा जाएगा। फिलहाल विभाग सरकार की स्वीकृति का इंतजार कर रहा है। वर्तमान में साकची कारा की क्षमता 198 बंदियों की है।

    महिला जेल के रूप में विकसित होने के बाद यहां सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और पुनर्वास की विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी। राज्य सरकार की मंजूरी मिलते ही आधारभूत संरचना को महिला बंदियों की जरूरतों के अनुरूप सुदृढ़ किया जाएगा।

    बता दें कि पूरे देश में वर्तमान में 31 महिला जेल हैं और महिला जेलों में अधीक्षक से लेकर सुरक्षाकर्मियों तक पूरा प्रबंधन महिलाओं द्वारा किया जाता है।

    महिला बंदियों के लिए होंगी विशेष सुविधाएं

    महिला कारा बनने के बाद साकची जेल में महिला बंदियों की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए कई नई व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।

    जेल परिसर में महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ाई जाएगी। साथ ही महिला बंदियों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक सीसीटीवी नेटवर्क और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

    स्वास्थ्य सेवाओं पर रहेगा विशेष फोकस

    महिला बंदियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, स्त्री रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता, प्रसूति संबंधी सुविधाएं और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श की व्यवस्था की जाएगी। जेल अस्पताल को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि महिला बंदियों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।

    ऐसी महिला बंदियां जिनके साथ छोटे बच्चे रहते हैं, उनके लिए अलग से क्रेच, पोषण आहार और खेलकूद की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। बच्चों के समुचित विकास और देखभाल के लिए विशेष प्रबंध किए जाएंगे।

    शिक्षा और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

    महिला बंदियों के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प, कंप्यूटर प्रशिक्षण और अन्य स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

    साथ ही साक्षरता और शैक्षणिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।

    महिला बंदियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए काउंसिलिंग सेंटर, योग एवं ध्यान कार्यक्रम तथा सामाजिक पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उद्देश्य यह होगा कि सजा पूरी होने के बाद महिलाएं समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक लौट सकें।

    सरकार की मंजूरी का इंतजार

    जेल विभाग का मानना है कि साकची कारा को महिला जेल में परिवर्तित करने से प्रदेशभर की महिला बंदियों के लिए एक केंद्रीकृत और बेहतर सुविधा वाला कारा उपलब्ध होगा।

    अब इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार है। स्वीकृति मिलते ही राज्य के पहले महिला कारा की स्थापना का रास्ता साफ हो जाएगा।

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