Weather Update: 27% कम बारिश से 23 जिले प्रभावित, पूर्वी सिंहभूम में केवल 50% धान की रोपनी
झारखंड में इस वर्ष मानसून की चाल धीमी रही, जिससे 1 जून से 5 अगस्त तक सामान्य से 27% कम बारिश दर्ज की गई और 23 जिले प्रभावित हुए। पूर्वी सिंहभूम में के ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)
HighLights
झारखंड में सामान्य से 27% कम बारिश दर्ज हुई।
राज्य के 23 जिले वर्षा घाटे से प्रभावित हैं।
पूर्वी सिंहभूम में केवल 50% धान की रोपनी हुई।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड में इस वर्ष मानसून की चाल ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 5 अगस्त तक राज्य भर में सामान्य से 27 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
इस अवधि के दौरान राज्य में औसतन 559.8 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, जबकि महज 408 मिलीमीटर वर्षा ही दर्ज हो सकी है। राज्य के कुल 24 जिलों में से 23 जिले वर्षा घाटे (रेनफॉल डेफिसिट) की चपेट में हैं।
पश्चिमी सिंहभूम एकमात्र ऐसा अपवाद जिला है, जहां सामान्य से 9 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। बाकी सभी जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
पूर्वी सिंहभूम में 16 प्रतिशत वर्षा घाटा
पूर्वी सिंहभूम जिला भी मानसून की बेरुखी से अछूता नहीं है। जिले में अब तक 506.7 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य रूप से यह आंकड़ा 600.6 मिलीमीटर होना चाहिए था।
करीब 94 मिलीमीटर की इस गिरावट (16 प्रतिशत कम वर्षा) का सीधा असर अब कृषि गतिविधियों पर दिखने लगा है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में अब तक लक्ष्य का केवल 50 प्रतिशत धान का आच्छादन (रोपनी) ही संभव हो सका है।
खेती-किसानी पर मंडराया संकट
धान की फसल के लिए जुलाई और अगस्त का पहला पखवाड़ा बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है। खेतों में पर्याप्त पानी न होने के कारण कई इलाकों में किसान रोपाई का काम पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में मूसलाधार बारिश नहीं होती है, तो न केवल धान की रोपाई की रफ्तार प्रभावित होगी, बल्कि फसल के कुल उत्पादन में भी भारी गिरावट आ सकती है।
अगले कुछ दिन किसानों के लिए निर्णायक
खरीफ सीजन को बचाने के लिए अब सारा दारोमदार अगस्त के शेष दिनों में होने वाली बारिश पर टिका है। यदि मानसून दोबारा पूरी तरह सक्रिय होता है, तो किसानों को राहत मिलेगी और रोपाई में तेजी आएगी।
इसके विपरीत, यदि बारिश का यह सूखा दौर लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और किसानों की आय पर पड़ेगा। फिलहाल पूरे पूर्वी सिंहभूम के किसान उम्मीद भरी निगाहों से आसमान की ओर देख रहे हैं।