कैरव केस: झारखंड-बंगाल सीमा बनी अपहरणकर्ताओं का Safe coridor, पुलिस को उलझाने के लिए बुना लोकेशंस का चक्रव्यूह
कैरव गांधी अपहरण मामले में जांच से अपराधियों की शातिराना रणनीति सामने आई है। उन्होंने डिजिटल तकनीक और भौगोलिक स्थितियों का फायदा उठाया, पुलिस को तीन ज ...और पढ़ें

कैरव गांधी का आवास।
HighLights
अपहरणकर्ताओं ने डिजिटल तकनीक, भौगोलिक स्थिति का उपयोग किया।
पुलिस को उलझाने के लिए सोनारी-कांदरबेड़ा में लोकेशन छोड़ी।
अंतरराज्यीय पेशेवर गिरोह पर पुलिस का शक गहराया।
कांदरबेड़ा: अपराधियों का 'गोल्डन एस्केप रूट'
चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा में कैरव की क्रेटा कार का मिलना महज इत्तेफाक नहीं है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कांदरबेड़ा अपराधियों के लिए एक रणनीतिक 'एग्जिटप्वाइंट' है।
- ट्राइजंक्शन का लाभ: यह स्थान जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम), सरायकेला-खरसावां और पश्चिम बंगाल की सीमा का मिलन स्थल है।
- बंगाल सीमा की निकटता: यहां से पश्चिम बंगाल का पुरुलिया और बलरामपुर जिला महज 30-40 मिनट की दूरी पर है। अपराधी जानते हैं कि अंतरराज्यीय समन्वय में लगने वाले समय का लाभ उठाकर वे आसानी से सीमा पार कर सकते हैं।
- दलमा के जंगल: एनएच-33 के किनारे स्थित डालमा के घने जंगल भी अपराधियों को छिपने या वाहन बदलने के लिए मुफीद जगह उपलब्ध कराते हैं।
- लोकेशन का मायाजाल: सोनारी और कांदरबेड़ा के बीच उलझी पुलिस
अपहरणकर्ताओं ने पुलिस को गुमराह करने के लिए 'डायवर्जनटैक्टिक्स' (ध्यान भटकाने की चाल) का सहारा लिया है। पुलिस के सामने सबसे बड़ा विरोधाभास मोबाइल और कार की लोकेशन को लेकर है:
- मोबाइल लोकेशन: कैरव के मोबाइल की अंतिम लोकेशन सोनारी के आदर्श नगर में मिली।
- कार की लोकेशन: उनकी क्रेटा कार शहर से दूसरी दिशा में चांडिल के कांदरबेड़ा में बरामद हुई।
अंतरराज्यीय पेशेवर गिरोह पर शक
पुलिस की 'घेराबंदी' और सीसीटीवी का सहारा
कोल्हान डीआईजी के निर्देश पर जमशेदपुर पुलिस ने अब पश्चिम बंगाल पुलिस से संपर्क साधा है। कांदरबेड़ा से बंगाल की ओर जाने वाले तमाम टोल प्लाजा और रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
पुलिस उस 'कनेक्टिंग लिंक' की तलाश में है जो सोनारी और कांदरबेड़ा के बीच अपराधियों की आवाजाही को साबित कर सके।