एमजीएम अस्पताल में महिला की मौत पर परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप; प्रबंधन बोले- कैंसर से पीड़ित थी मरीज
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में एक महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। अस्पताल प्रशासन ने आरोपों ...और पढ़ें

एमजीएम जमशेदपुर का फाइल फोटो।
HighLights
अस्पताल प्रशासन ने कैंसर से मौत की बात कही।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार दोपहर एक महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। हंगामा बढ़ता देख अस्पताल प्रशासन को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पड़े।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, मामला एमजीएम थाना क्षेत्र के एदेलबेड़ा गांव निवासी 59 वर्षीय टुसू गोराई की मौत से जुड़ा है। मृतका के पुत्र गणेश गोराई ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी मां को शनिवार को सांस लेने में तकलीफ होने के बाद एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें चौथे माले पर रखा गया था।
परिजनों का आरोप है कि सोमवार दोपहर अचानक टुसू गोराई का शरीर ठंडा पड़ने लगा था। इसकी जानकारी ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों को दी गई, लेकिन समय पर डॉक्टरों ने ध्यान नहीं दिया।
काफी मिन्नतें करने के बाद मरीज को दो इंजेक्शन लगाए गए, लेकिन इसके करीब दो घंटे बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर सही इलाज मिलता तो जान बच सकती थी।
सुरक्षाकर्मियों और होमगार्ड जवानों ने संभाला मोर्चा
मौत की खबर मिलते ही आक्रोशित परिजनों ने वार्ड के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस हंगामे के कारण अस्पताल के अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को भी काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।
स्थिति बिगड़ती देख मौके पर तुरंत अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों को भेजा गया। बाद में सुरक्षा के लिहाज से 10 से अधिक होमगार्ड जवानों को तैनात किया गया। करीब आधे घंटे तक समझाने-बुझाने के बाद परिजन शांत हुए।
अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को नकारा
दूसरी ओर, एमजीएम अस्पताल के डॉक्टरों और प्रशासन ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने कहा कि महिला पित्ताशय (Gallbladder) के कैंसर से पीड़ित थीं और उनकी स्थिति पहले से ही बेहद नाजुक थी।
भर्ती के समय ही परिजनों को मरीज की गंभीर स्थिति से अवगत करा दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इलाज में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई और मेडिकल टीम लगातार मरीज की निगरानी कर रही थी।