डिमना लेक हादसे के बाद MGM जमशेदपुर का बड़ा एक्शन, हॉस्टल से हटेंगे अवैध कब्जे
डिमना हादसे के बाद एमजीएम मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर ने हॉस्टल के 68 अवैध कमरों को खाली कराने का अभियान शुरू किया है। अवैध कब्जे के कारण नए इंटर्न डॉक्टरों ...और पढ़ें

महात्मा गांधी मेमोरियल। फाइल फोटो
HighLights
डिमना हादसे के बाद एमजीएम कॉलेज में हॉस्टल अभियान शुरू।
68 कमरों पर अवैध कब्जा, नए इंटर्न को आवास नहीं।
अवैध कब्जाधारियों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। डिमना लेक से जुड़े एक जलाशय में दो इंटर्न डॉक्टर की दर्दनाक मौत के बाद महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने हॉस्टल व्यवस्था को लेकर बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। कॉलेज प्रबंधन ने साकची शीतला मंदिर के पास स्थित इंटर्न डॉक्टर हॉस्टल के 68 कमरों पर वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जे को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
प्रशासन का मानना है कि हॉस्टल में अनधिकृत रूप से रह रहे पासआउट डॉक्टर और इंटर्न की वजह से नए छात्रों को रहने के लिए कमरे नहीं मिल पा रहे हैं। अब नोटिस के बाद भी हॉस्टल खाली नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साकची स्थित इंटर्न छात्रावास-1 और छात्रावास-2 में कुल 108 कमरे हैं।
हॉस्टल समिति की जांच के दौरान सामने आया कि दोनों हॉस्टल में सिर्फ 40 कमरों के लिए ही जूनियर डॉक्टर ने वैध आवंटन का आवेदन दिया है। बाकी 68 कमरे अब भी अनधिकृत रूप से बंद रखे गए हैं या उन पर ऐसे चिकित्सकों का कब्जा है जिनकी पढ़ाई पूरी हो चुकी है।
कॉलेज अधीक्षक की ओर से कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन कब्जाधारियों ने कमरे खाली नहीं किए। इसके बाद पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट तैयार की गई और प्रशासन से सहयोग भी मांगा गया है। अब अवैध कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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150 एमबीबीएस सीटें, लेकिन नए इंटर्न को नहीं मिल रहा हॉस्टल
एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सत्र 2025-26 से एमबीबीएस की सीटें 100 से बढ़ाकर 150 कर दी गई हैं। सीटें बढ़ने के साथ इंटर्न डॉक्टर की संख्या भी बढ़ी है, लेकिन हॉस्टल के अधिकांश कमरे पुराने छात्रों और पासआउट डॉक्टर के कब्जे में होने के कारण नए इंटर्न को आवास नहीं मिल पा रहा है।
कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, करीब 100 नए इंटर्न इस समस्या से प्रभावित हैं। पूर्व में अधीक्षक ने धालभूमगढ़ के एसडीओ को भी पत्र लिखकर हॉस्टल खाली कराने में प्रशासनिक सहयोग मांगा था।
नर्स क्वार्टर और नर्सिंग हॉस्टल भी कब्जे की जद में
पुराने एमजीएम अस्पताल परिसर के पास स्थित 68 नर्स क्वार्टरों में भी करीब 90 प्रतिशत हिस्से पर अवैध कब्जा है। इन क्वार्टरों को खाली कराने के लिए प्रशासन ने निर्देश जारी किए हैं, ताकि जरूरतमंद इंटर्न और छात्रों को वहां रहने की सुविधा दी जा सके। एमजीएम कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. दिवाकर हांसदा भी इस संबंध में तत्कालीन उपायुक्त से कार्रवाई का अनुरोध कर चुके हैं।
वहीं, डिमना चौक स्थित एमजीएम परिसर के नर्सिंग हॉस्टल में भी करीब 50 इंटर्न डॉक्टर अनधिकृत रूप से रह रहे हैं, जबकि यह हॉस्टल नर्सिंग छात्रों के लिए बनाया गया है। इसके अलावा एमबीबीएस छात्रों के हॉस्टल में भी करीब एक दर्जन इंटर्न डॉक्टर के रहने की जानकारी मिली है। सभी को नोटिस जारी कर हॉस्टल खाली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
हॉस्टल व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी गलत ढंग से रह रहे हैं, उन्हें हॉस्टल खाली करना होगा। अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. संजय कुमार, प्रिंसिपल, एमजीएम
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