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    18 साल पहले किताब लेने निकला था किशोर, अब 5 लाख का इनामी नक्सली बनकर चढ़ा पुलिस के हत्थे

    By Sudhir GoraiEdited By: Sanjeev Kumar
    Updated: Thu, 06 Aug 2026 08:00 AM (IST)

    झारखंड के सरायकेला में 5 लाख का इनामी नक्सली सागर सिंह उर्फ रवि सरदार 18 साल बाद गिरफ्तार हुआ है। वह 2008 में किताब खरीदने निकला था और नक्सली बन गया। ...और पढ़ें

    पांच लाख का इनामी नक्‍सली सागर सिंह उर्फ रवि सरदार के पकड़े जाने पर पिता बोले क‍ि सुकून है कि उनका बेटा जीवित है।

    पांच लाख का इनामी नक्‍सली सागर सिंह उर्फ रवि सरदार के पकड़े जाने पर पिता बोले क‍ि सुकून है कि उनका बेटा जीवित है।

    HighLights

    1. 2008 में किताब लेने निकला किशोर, बना 5 लाख का इनामी।

    2. परिवार ने बेटे के जीवित होने पर राहत और खुशी जताई।

    सुधीर गोराई, नीमडीह। झारखंड के सरायकेला जिले स्थित नीमडीह के टेंगाडीह निवासी सागर सिंह उर्फ रवि सरदार की 18 साल बाद गिरफ्तारी से सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। 
     
    वहीं, उसके परिवार के लिए यह भावुक क्षण साबित हुआ। वर्ष 2008 में महज एक किताब खरीदने की बात कहकर घर से निकला किशोर आज 5 लाख का इनामी नक्सली बनकर पुलिस की गिरफ्त में आया है।
     
    बुधवार को सुरक्षा बलों और पुलिस के संयुक्त नक्सल विरोधी अभियान में कुल 22 लाख रुपये के तीन इनामी नक्सलियों को दबोचा गया।
    इनमें 15 लाख का इनामी मदन महतो, 2 लाख की इनामी मीना पहाड़िया और 5 लाख का इनामी सागर सिंह शामिल हैं। 
     
    कांड्रा थाना क्षेत्र के उदयपुर में सागर के छिपे होने की गुप्त सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया। सागर से मिली जानकारी के आधार पर चांडिल से मदन और मीना को भी पकड़ा गया। 
     
    इनके पास से एके-47 राइफल और पिस्टल बरामद की गई है। इधर, सागर के जीवित होने की पुष्टि होते ही उसके पैतृक गांव टेंगाडीह में हलचल तेज हो गई। 
     
    परिजनों ने बताया कि पढ़ाई के दौरान वह चांडिल जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन लौटकर नहीं आया। काफी खोजबीन के बाद पता चला कि वह नक्सली संगठन से जुड़ गया है। 
     
    परिजनों ने उसे वापस लाने और आत्मसमर्पण कराने के कई प्रयास किए, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। 18 साल बाद उसकी गिरफ्तारी की खबर से परिजनों की आंखों में आंसू छलक आए। 
     
    हालांकि, उन्हें इस बात का सुकून है कि उनका बेटा जीवित है। परिजनों को उम्मीद है कि सागर अब नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटेगा और सामान्य जीवन जी सकेगा।