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NMC का नया नियम: MBBS और इंटर्नशिप के लिए अब 10 साल, फर्स्ट ईयर पास करने के 4 मौके ही मिलेंगे

Published: Tue, 22 Sep 2026 07:00 AM (IST)Updated: Tue, 22 Sep 2026 07:53 AM (IST)

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एमबीबीएस छात्रों के लिए अपनी पूरी पढ़ाई और अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करने की अधिकतम समय-सीमा 9 से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दी है।

एनएमसी ने देश भर के मेडिकल कॉलेजों को पत्र भेजकर इस नए प्रावधान की आधिकारिक जानकारी दे दी है।

एनएमसी ने देश भर के मेडिकल कॉलेजों को पत्र भेजकर इस नए प्रावधान की आधिकारिक जानकारी दे दी है।

HighLights

  1. एमबीबीएस और इंटर्नशिप पूरी करने की समय-सीमा 10 वर्ष हुई।

  2. यह अवधि प्रथम वर्ष की कक्षा में शामिल होने से गिनी जाएगी।

  3. गंभीर परिस्थितियों में छात्रों को पढ़ाई पूरी करने में मदद मिलेगी।

जासं, जमशेदपुर। चिकित्सा शिक्षा (मेडिकल एजुकेशन) की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने राहत भरा बदलाव किया है। 
 
एनएमसी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले छात्रों को अब अपनी पूरी शैक्षणिक पढ़ाई और अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप को पूरा करने के लिए अधिकतम 10 वर्ष का समय मिलेगा।
 
पूर्व में इस संपूर्ण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अधिकतम समय-सीमा 9 वर्ष निर्धारित थी। एनएमसी ने देश भर के मेडिकल कॉलेजों को पत्र भेजकर इस नए प्रावधान की आधिकारिक जानकारी दे दी है। 

कोल्हान के मेडिकल कॉलेजों पर पड़ेगा असर 

एनएमसी के इस नए फैसले का सीधा असर जमशेदपुर स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ निजी क्षेत्र के मणिपाल मेडिकल कॉलेज और नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज के सैकड़ों छात्रों पर पड़ेगा। 

किस दिन से होगी 10 वर्ष की गणना? 

एनएमसी ने अपने पत्र में यह स्पष्ट रूप से साफ किया है कि 10 वर्ष की समय-सीमा की गणना केवल काउंसिलिंग या सीट आवंटन की तारीख से नहीं होगी। 
 
इसकी गणना उस दिन से की जाएगी, जिस दिन विद्यार्थी आधिकारिक रूप से प्रथम वर्ष (1st Year) के एमबीबीएस पाठ्यक्रम की कक्षा में शामिल होगा। 
 
इस तय 10 वर्षों के भीतर छात्र को साढ़े चार वर्ष का अकादमिक कोर्स और एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप हर हाल में पूरी करनी होगी। 

प्रथम वर्ष के लिए 4 अवसरों का नियम बरकरार 

यद्यपि कुल समय-सीमा में एक वर्ष का विस्तार किया गया है, लेकिन एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा पास करने के नियमों में कोई ढील नहीं दी गई है। विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष पास करने के लिए पूर्व की भांति अधिकतम चार अवसर ही दिए जाएंगे।
 
यदि कोई छात्र लगातार चार प्रयासों में भी प्रथम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण करने में विफल रहता है, तो उसे आगे की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति नहीं होगी।
 
इसका अर्थ यह है कि 10 वर्ष की बढ़ी हुई सीमा अतिरिक्त प्रयासों के लिए नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में पढ़ाई पूरी करने के लिए दी गई है। 

गंभीर परिस्थितियों में छात्रों को मिलेगा संबल 

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उमाशंकर सिंह के अनुसार, कई बार गंभीर बीमारी, पारिवारिक दुर्घटनाओं या अन्य अप्रत्याशित कारणों से मेधावी छात्रों की पढ़ाई लंबे समय तक बाधित हो जाती है। 
 
ऐसे छात्रों का करियर बर्बाद होने से बचाने में यह अतिरिक्त एक वर्ष संजीवनी का काम करेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य कोर्स की अवधि (साढ़े चार साल प्लस एक साल इंटर्नशिप) में कोई बदलाव नहीं हुआ है और छात्रों को परीक्षा, अटेंडेंस व ट्रेनिंग के अन्य मानक पूरे करने ही होंगे।
 
एनएमसी ने सभी मेडिकल कॉलेज प्रशासनों को निर्देश दिया है कि वे नए सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को इन नियमावलियों की स्पष्ट जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं।