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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 15, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    अब बच्चों पर RSV Virus का खतरा, इन 5 लक्षणों के साथ फैलता है संक्रमण; अस्पताल पहुंच रहे मरीज

    Updated: Wed, 15 Jan 2025 03:48 PM (IST)

    एचएमपीवी और आरएसवी वायरस के बढ़ते मामलों के बीच जमशेदपुर में अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है लेकिन स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। दोनों वायरस श्वसन संबंधित ह ...और पढ़ें

    बच्चों में आरएसवी वायरस का खतरा (जागरण)
    बच्चों में आरएसवी वायरस का खतरा (जागरण)

    HighLights

    1. शहर में बढ़ते मामले को देखते हुए शिशु रोग विशेषज्ञों ने किया सतर्क
    2. सर्दी-खांसी को हल्के में नहीं लें, हो सकता है गंभीर वायरस का कारण

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। एचएमपीवी (ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस) वायरस के साथ ही शहर में आरएसवी (रेस्पिरेटरी सिंकिशियल वायरस) वायरस का भी खतरा मंडरा रहा है। यह दोनों एक दूसरे से मिलता जुलता वायरस है और इस मौसम में इसके केस भी सामने आते हैं।

    हालांकि, राहत की बात यह है कि जमशेदपुर में अभी तक इससे संबंधित कोई मरीज की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन विभाग अपने स्तर से पूरा सतर्क है।

    एचएमपीवी वायरस की जांच के लिए महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कालेज स्थित वीआरडीएल लैब (वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी) को चयनित किया गया है।

    शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार, ये दोनों वायरस श्वसन संबंधित है, जो बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति को अधिक प्रभावित करता है।

    ऐसे में बच्चों को सबसे अधिक सतर्क होने की जरूरत है। चिंता का विषय यह भी है कि अभी इन दोनों बीमारी के लक्षण वाले मरीज अस्पतालों में सबसे अधिक पहुंच रहे हैं।

    ये हैं RSV वायरस के लक्षण (RSV Virus Symptoms)

    इसके लक्षण में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, नाक बंद होना सहित अन्य शामिल है। अगर, इसका समय पर इलाज नहीं हुआ तो यह आगे चलकर ब्रोंकियोलाइटिस या न्यूमोनिया का कारण बन सकता है, जिससे मरीजों की जान तक चली जाती है। ऐसे में इस बीमारी को लेकर अधिक सतर्क होने की जरूरत है। एमजीएम अस्पताल में रोजाना 40 से अधिक बच्चे सर्दी-खांसी व बुखार से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। 

    एचएमपीवी वायरस क्या है? एचएमपीवी को पहली बार 2001 में पहचाना गया था और यह श्वसन संक्रमण का एक प्रमुख कारण है। यह वायरस श्वसन बूंदों और दूषित सतहों से फैलता है। इसके लक्षण में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट, नाक बंद होना शामिल हैं।

    ऐसी परिस्थिति में तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए। एचएमपीवी वायरस हल्के जुकाम से लेकर गंभीर ब्रोंकियोलाइटिस या न्यूमोनिया तक हो सकता है। 

    आरएसवी वायरस क्या है? (What is RSV Virus)

    आरएसवी 1950 के दशक से ज्ञात है और विशेष रूप से दो वर्ष से कम उम्र के शिशुओं में श्वसन संक्रमण का प्रमुख कारण है। यह वायरस भी श्वसन बूंदों और दूषित सतहों के माध्यम से फैलता है। इसके लक्षण में बहती नाक, खांसी और छींक, घरघराहट, बुखार भूख कम लगना शामिल है। यह शिशुओं में अधिक गंभीर हो सकता है और ब्रोंकियोलाइटिस या न्यूमोनिया का कारण बन सकता है। 

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    इन बातों का रखें ध्यान

    • बचाव के उपाय - साफ-सफाई का ध्यान रखें।
    • साबुन और पानी से हाथ धोएं। 
    • संक्रमित व्यक्तियों से दूरी बनाएं। 
    • रोजमर्रा की उपयोग की जाने वाली सतहों को साफ करें। 
    • भीड़भाड़ वाले स्थानों में मास्क का उपयोग करें। 
    • लक्षण दिखने पर सार्वजनिक स्थानों से बचें। 

    अभी के समय में सबसे अधिक बच्चे सर्दी-खांसी, सांस की परेशानी, नाक बंद होना, न्यूमोनिया सहित अन्य परेशानी लेकर पहुंच रहे हैं। ऐसे में ये एचएमपीवी के साथ-साथ आरएसवी वायरस का भी लक्षण हो सकता है। हालांकि, बीमारी की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। - डा. केके चौधरी, शिशु रोग विशेषज्ञ, एमजीएम 

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