ओडिशा बनेगा दुनिया का स्टील हब, 2030 तक 10 करोड़ टन उत्पादन का लक्ष्य; तो जमशेदपुर से आगे निकल जाएगा कलिंगनगर
ओडिशा ने 2030 तक स्टील उत्पादन को 2.7 करोड़ टन से बढ़ाकर 10 करोड़ टन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। टाटा स्टील के सीईओ टीवी नरेंद्रन ने बताया कि ...और पढ़ें

टीवी नरेंद्रन ने कहा- ओडिशा में स्टील उत्पादन को बढ़ाकर 10 करोड़ टन करने का लक्ष्य।
HighLights
ओडिशा का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन स्टील उत्पादन।
सीएम मोहन मांझी से इंडियन स्टील एसोसिएशन की उच्चस्तरीय बैठक।
लौह अयस्क आपूर्ति, बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। ओडिशा को देश का सबसे बड़ा स्टील उत्पादक राज्य बनाने की दिशा में बड़ी पहल शुरू हो गई है। वर्तमान में 2.7 करोड़ टन (27 मिलियन टन) उत्पादन वाले इस राज्य की क्षमता को वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन (100 मिलियन टन) तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
इसे लेकर इंडियन स्टील एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की।
टाटा स्टील के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन ने बताया कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य किसी एक कंपनी का विस्तार नहीं, बल्कि राज्य के समग्र औद्योगिक विकास का रोडमैप तैयार करना था।
नरेंद्रन ने स्पष्ट किया कि स्टील कंपनियां उत्पादन बढ़ाने के दौरान आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं की पहचान कर रही हैं। इन चुनौतियों का समाधान राज्य के उद्योग विभाग के साथ मिलकर निकाला जाएगा, ताकि दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित हो सके।
बैठक में स्टील दिग्गजों ने राज्य सरकार के सामने दो मुख्य मांगें रखी हैं। पहला, लौह अयस्क की निरंतर आपूर्ति, जिसके लिए ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन से स्थानीय उद्योगों को कच्चा माल प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
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दूसरी मांग बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण को लेकर है, क्योंकि प्लांट विस्तार के साथ-साथ परिवहन और लॉजिस्टिक की जरूरतें भी बढ़ेंगी। इस महत्वपूर्ण चर्चा में जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन नवीन जिंदल, जेएसडब्ल्यू स्टील के सज्जन जिंदल, आर्सेलर मित्तल निप्पोन स्टील के सीईओ दिलीप ओम्मेन और स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के प्रतिनिधि शामिल हुए।
यह बैठक न केवल ओडिशा बल्कि पूरे देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। स्टील जगत के इन दिग्गजों का मानना है कि यदि कच्चा माल और बेहतर बुनियादी ढांचा समय पर मिले, तो ओडिशा स्टील उत्पादन के वैश्विक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई स्थापित करेगा।
जमशेदपुर में टाटा स्टील से जुड़े व्यवसाई व एक्सपर्ट भरत वसानी बताते हैं, टाटा स्टील का भविष्य कलिंग नगर में है। झारखंड की तुलना में ओड़िशा में तेजी से प्रोडक्शन और सुविधाएं बढ़ रही है।
जमशेदपुर बनाम कलिंगनगर – भविष्य की रेस
1. विस्तार की असीमित संभावनाएं
जमशेदपुर: शहर के बीचों-बीच स्थित होने के कारण जमशेदपुर प्लांट के पास अब भौतिक विस्तार (Physical Expansion) के लिए जगह बहुत सीमित है। यहाँ उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए पुरानी इकाइयों को हटाकर नई तकनीक लगानी पड़ती है।
कलिंगनगर: टाटा स्टील के पास कलिंगनगर में विशाल भू-खंड (Land Bank) उपलब्ध है। यहां शून्य से (Greenfield) शुरुआत होने के कारण प्लांट को भविष्य में 25-30 मिलियन टन तक ले जाना अधिक आसान है।
2. कच्चे माल की निकटता
ओडिशा भारत का 'लौह अयस्क भंडार' (Iron Ore Hub) है। कलिंगनगर प्लांट के पास ही टाटा स्टील की अपनी प्रमुख खदानें (जैसे जोडा और खोंदबोंद) स्थित हैं। इससे परिवहन लागत (Logistics Cost) जमशेदपुर की तुलना में काफी कम हो जाती है, जो स्टील उत्पादन में एक बड़ा 'मार्जिन' देता है।
3. 'पोर्ट-आधारित' अर्थव्यवस्था का लाभ
जमशेदपुर एक 'लैंडलॉक्ड' शहर है। इसके विपरीत, कलिंगनगर पारादीप और धामरा बंदरगाहों के काफी करीब है।
- निर्यात : विदेशों में स्टील भेजने के लिए कलिंगनगर से शिपमेंट भेजना सस्ता और तेज है।
- आयात : कोकिंग कोल जैसे कच्चे माल को विदेशों से मंगाने में भी कलिंगनगर को सीधा भौगोलिक लाभ मिलता है।
4. अत्याधुनिक तकनीक (Industry 4.0)
कलिंगनगर प्लांट को 'वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम' द्वारा 'ग्लोबल लाइटहाउस' का दर्जा दिया गया है। यह दुनिया के उन चुनिंदा प्लांट्स में से है जो पूरी तरह से डेटा और डिजिटल ऑटोमेशन पर आधारित हैं। जमशेदपुर एक सौ साल पुराना प्लांट है, जबकि कलिंगनगर आधुनिक इंजीनियरिंग का शिखर है।
तुलनात्मक चार्ट: एक नजर में
| विशेषता | जमशेदपुर (TATA Main Plant) | कलिंगनगर (Kalinganagar) |
| स्थापना | 1907 (विरासत) | 2016 (आधुनिकता) |
| भौगोलिक स्थिति | शहर के भीतर (सीमित जगह) | इंडस्ट्रियल हब (विशाल जगह) |
| लॉजिस्टिक्स | केवल रेल और सड़क | रेल, सड़क और बंदरगाह |
| उत्पादन क्षमता | ~11-12 MTPA (स्थिरता की ओर) | ~8 MTPA (तेजी से बढ़ता हुआ लक्ष्य 13+ MTPA) |
| लागत प्रभावशीलता | मध्यम | उच्च (खदानों के करीब होने के कारण) |
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