पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही एक्शन: पुरुलिया में TMC के 13 बड़े नेताओं की सुरक्षा हटाई गई
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद पुरुलिया जिले में तृणमूल कांग्रेस के 13 प्रमुख नेताओं और पूर्व विधायक नेपाल महतो की पुलिस सुरक्षा हटा दी गई है। ...और पढ़ें

पुरुलिया जिला में टीएसमी नेताओं की पुलिस सुरक्षा हटाई गई(AI Generated)।
HighLights
पूर्व विधायक नेपाल महतो की भी सुरक्षा वापस ली गई।
37 सशस्त्र पुलिस जवानों को ड्यूटी से हटाया गया।
जागरण संवाददाता, पुरुलिया। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में पुरुलिया जिले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 13 प्रमुख नेताओं की पुलिस सुरक्षा को पूरी तरह हटा दिया गया है।
राज्य में हुए राजनीतिक परिवर्तन के बाद इसे तृणमूल कांग्रेस के लिए जिला स्तर पर एक बड़ा झटका माना जा रहा है। TMC के अलावा, इस कार्रवाई की जद में पुरुलिया जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक नेपाल महतो भी आए हैं, जिनकी सुरक्षा व्यवस्था को प्रशासन ने वापस ले लिया है।
इन दिग्गज नेताओं की हटाई गई सुरक्षा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरक्षा गार्ड हटाए जाने वाले नेताओं की सूची में जिले के कई कद्दावर चेहरे शामिल हैं। कुल 37 सशस्त्र पुलिस जवानों को इन नेताओं की ड्यूटी से हटाकर वापस बैरक भेज दिया गया है। सुरक्षा खोने वाले मुख्य नेताओं के नाम इस प्रकार हैं:
- संध्या रानी टुडू: पूर्व मंत्री और टीएमसी नेत्री
- शांतिराम महतो: चेयरमैन, पुरुलिया जिला टीएमसी कमेटी
- सौमेन बेरथरिया: सचिव, पश्चिम बंगाल प्रदेश टीएमसी कमेटी
- स्वपन बेलथरिया: पूर्व विधायक और प्रदेश टीएमसी सचिव
- राजीव लोचन सोरेन: पूर्व विधायक और पुरुलिया जिला टीएमसी अध्यक्ष
- अघोर हेंब्रम: मेंटर, पुरुलिया जिला परिषद
- सद्दाम हुसैन अंसारी: अध्यक्ष, पुरुलिया जिला टीएमसी माइनॉरिटी सेल
- शेख सुलेमान: उपाध्यक्ष, पुरुलिया जिला टीएमसी माइनॉरिटी सेल
- उज्जवल कुमार: अध्यक्ष, पुरुलिया जिला टीएमसी मजदूर संगठन
- अर्जुन महतो व प्रतिमा सोरेन: सदस्य, जिला परिषद
- तूफान राई: प्रधान, आड़रा पंचायत (रघुनाथपुर 1 ब्लॉक)
37 सशस्त्र जवानों की हुई वापसी
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इन सभी राजनेताओं की सुरक्षा के लिए पश्चिम बंगाल राज्य पुलिस के 37 सशस्त्र जवानों को तैनात किया गया था। इन्हें बॉडीगार्ड और हाउस गार्ड के रूप में नियुक्त किया गया था।
नए आदेश के बाद इन सभी जवानों को उनकी ड्यूटी से मुक्त कर दिया गया है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अचानक उठाए गए इस कदम से जिले की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।