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    सावधान युवा! घंटों स्क्रीन टाइम, कम नींद और जंक फूड दे रहे थायराइड को दावत, जानें डॉक्टरों की राय

    Updated: Sun, 24 May 2026 09:03 PM (IST)

    मोबाइल, लैपटॉप और जंक फूड के अत्यधिक सेवन से युवाओं में थायराइड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, देर रात तक जागना, स्क्रीन टाइम और ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    HighLights

    1. युवाओं में तेजी से बढ़ रहे थायराइड के मामले।

    2. स्क्रीन टाइम, जंक फूड, तनाव मुख्य कारण।

    3. जीवनशैली में बदलाव से बीमारी नियंत्रित संभव।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल लाइफस्टाइल के इस दौर में युवाओं की जिंदगी जितनी हाईटेक हुई है, उनकी सेहत उतनी ही दांव पर लग गई है। देर रात तक जागना, घंटों स्क्रीन के सामने बैठकर काम करना, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और मानसिक तनाव अब युवाओं की सेहत पर भारी पड़ने लगा है।
     
    इसका सबसे बुरा असर शरीर के हार्मोनल संतुलन पर दिख रहा है, जिसके कारण अब 22 से 30 साल के युवाओं में थायराइड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पहले थायराइड को अमूमन महिलाओं और बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था। 
     
    लेकिन अब अस्पतालों में कम उम्र के युवक-युवतियां भी इसकी चपेट में आकर पहुंच रहे हैं। मरीजों में लंबे समय से थकान, अचानक वजन बढ़ना, बाल झड़ना और चिड़चिड़ापन जैसी शिकायतें आम हो चुकी हैं।
     

    स्क्रीन टाइम और वर्क स्ट्रेस बढ़ा रहा है खतरा  

    महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज की पूर्व चिकित्सक डॉ. वनिता सहाय ने बताया क‍ि सूचना प्रौद्योगिकी (IT), डिजिटल मीडिया, कॉल सेंटर और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले युवाओं में थायराइड का सबसे ज्यादा खतरा देखा जा रहा है। 
     
    लगातार स्क्रीन के सामने बैठना, शिफ्ट में काम करना, देर रात तक जागना और लगातार मानसिक तनाव झेलना सीधे तौर पर शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम (हार्मोनल सिस्टम) को बिगाड़ रहा है।
     
    डॉक्टरों के अनुसार, कई युवा शुरुआती दौर में इसे सामान्य कमजोरी या काम की थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर रूप ले लेती है।
     

    फास्ट फूड और खराब खानपान ने बिगाड़ा खेल  

    कई मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब थायराइड का स्तर काफी बढ़ चुका होता है। डिजिटल लाइफस्टाइल के साथ-साथ युवाओं की डाइट भी थायराइड के मामलों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक:
     
    मुख्य विलेन: बाहर का तला-भुना खाना, प्रोसेस्ड फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और बेवक्त खाने की आदत। 
    असर: शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलने और केमिकल-युक्त फूड के कारण थायराइड ग्रंथि का काम प्रभावित होता है और हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं। 
     

    थायराइड के मुख्य लक्षण और डॉक्टर की सलाह   

    यदि आपको या आपके किसी करीबी को नीचे दिए गए लक्षण लंबे समय से महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर थायराइड प्रोफाइल टेस्ट ($T3, T4, TSH$) करवाना चाहिए:
           सामान्य लक्षण                                     खानपान में क्या शामिल करें?
    • लगातार अत्यधिक थकान और कमजोरी          हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल
    • अचानक वजन बढ़ना या तेजी से घटना           दूध, दही और पनीर (प्रोटीन युक्त भोजन)
    • बालों का तेजी से झड़ना                           आयोडीन की सही मात्रा वाला नमक
    • स्वभाव में चिड़चिड़ापन और घबराहट             दिनभर में पर्याप्त पानी का सेवन
    • चेहरे, आंखों या पैरों पर सूजन                     जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स से पूरी दूरी
     

    लाइफस्टाइल में बदलाव ही है सबसे बड़ा बचाव 

    विशेषज्ञों का कहना है कि थायराइड को दवाओं के साथ-साथ एक अनुशासित दिनचर्या अपनाकर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए युवाओं को अपनी जीवनशैली में ये 4 बड़े बदलाव तुरंत करने चाहिए:
    •     7 से 8 घंटे की भरपूर नींद लें: देर रात तक मोबाइल स्क्रॉल करने की आदत छोड़ें।
    •     शारीरिक गतिविधि: रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम, वॉक या योग जरूर करें।
    •     तनाव प्रबंधन: मेडिटेशन अपनाएं और काम के बीच में छोटे ब्रेक लें। 
    •     समय पर जांच: समय रहते इलाज शुरू होने पर थायराइड को पूरी तरह नियंत्रित रखा जा सकता है।

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाओं और युवतियों में थायराइड तेजी से बढ़ रहा है। लगातार तनाव, सही खान-पान नहीं होना, कम नींद और लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने से हार्मोन असंतुलित हो रहे हैं।

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    - डाॅ. रेणुका चौधरी, महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ

    कम उम्र की महिलाओं में थायराइड की समस्या पहले के मुकाबले तेजी से बढ़ी है। अनियमित दिनचर्या, तनाव और नींद की कमी इसका बड़ा कारण है।

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    - डाॅ. वनिता सहाय, महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ