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    सरायकेला-खरसावां में निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन का 'हंटर', 10% से ज्यादा फीस बढ़ाई तो खैर नहीं

    Updated: Wed, 29 Apr 2026 10:52 AM (GMT+05:30)

    सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर नकेल कसी है। अब स्कूल एक सत्र में 10% से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे और अगले दो सा ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    HighLights

    1. एक बार वृद्धि के बाद दो साल तक रोक।

    2. किताबें, यूनिफॉर्म किसी खास दुकान से नहीं खरीदनी होगी।

    संवाद सूत्र, आदित्यपुर। सरायकेला-खरसावां जिले के हजारों अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है। निजी विद्यालयों द्वारा हर साल की जाने वाली अनियंत्रित फीस वृद्धि और मनमानी पर जिला प्रशासन ने नकेल कस दी है। 
     
    मंगलवार को उपायुक्त (DC) की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि अब कोई भी निजी स्कूल एक सत्र में 10 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा।
     

    दो साल तक फीस बढ़ाने पर 'फुल स्टॉप'

    प्रशासन ने फीस वृद्धि को लेकर कड़े नियम तय किए हैं। नए आदेश के अनुसार:

    •     यदि कोई विद्यालय 10% से अधिक फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे जिला समिति से अनिवार्य रूप से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
    •     एक बार फीस में बढ़ोतरी करने के बाद अगले दो वर्षों तक किसी भी प्रकार की वृद्धि पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
    •     सभी स्कूलों को पिछले तीन सत्रों और आगामी सत्र 2026-27 की कक्षावार फीस का पूरा ब्योरा एक सप्ताह के भीतर प्रशासन को सौंपना होगा।


    किताब-यूनिफॉर्म के लिए नहीं कर सकेंगे मजबूर

    बैठक में अभिभावकों के शोषण को रोकने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए:

    •     बाजार की आजादी: स्कूल प्रबंधन किसी भी छात्र या अभिभावक को किसी खास दुकान से ही किताबें, कॉपियां या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए विवश नहीं कर सकेगा।
    •     अवैध वसूली पर रोक: नामांकन (Admission) या दोबारा प्रवेश (Re-admission) के नाम पर ली जाने वाली अतिरिक्त राशि को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
    •     पारदर्शिता: हर स्कूल में शुल्क समिति और अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का गठन अनिवार्य होगा। इन सदस्यों के नाम स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करने होंगे।


    शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम का होगा पालन

    झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम के तहत स्कूलों को जवाबदेह बनाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। आदित्यपुर जैसे क्षेत्रों में फीस वृद्धि को लेकर अक्सर होने वाले आंदोलनों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उपायुक्त ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।