टोंटो: बीमारी ठीक होने की उम्मीद में बदला था धर्म, अब सोंगा केराई ने फिर मानी 'हो' समाज की परंपरा
पश्चिमी सिंहभूम के बुंडू गांव में सोंगा केराई ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ ईसाई धर्म छोड़कर सरना धर्म में वापसी की। दो साल पहले बीमारी ठीक होने क ...और पढ़ें

बुंडू गांव के रेंगो टोला में समारोह आयोजित कर सरना धर्म में वापसी करते लोग।
HighLights
सोंगा केराई ने परिवार संग सरना धर्म में वापसी की।
पारंपरिक शुद्धिकरण संस्कार से समाज में पुनः शामिल हुए।
संवाद सूत्र, जगन्नाथपुर। पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड अंतर्गत बुंडू गांव (रेंगो टोला) में रविवार को एक परिवार ने अपनी मूल संस्कृति और प्राकृतिक आस्था की ओर वापसी की। लगभग दो वर्ष पूर्व ईसाई धर्म अपनाने वाले 28 वर्षीय सोंगा केराई ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ विधिवत सरना धर्म को पुनः स्वीकार किया।
धार्मिक अनुष्ठान और शुद्धिकरण
आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में पारंपरिक शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गांव के दियुरी (पुजारी) जवान अंगरिया ने हो समाज की परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की।
'जाते-परचि' (शुद्धिकरण) संस्कार के बाद परिवार को सामाजिक रूप से पुनः स्वीकार किया गया। इस दौरान परिवार ने समाज के रीति-रिवाज, पारंपरिक त्योहारों और जन्म-मृत्यु से जुड़े संस्कारों को मानने का संकल्प लिया।
बीमारी के कारण बदला था धर्म
सोंगा केराई ने बताया कि लगभग दो वर्ष पहले परिवार में बीमारी ठीक होने की उम्मीद में उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया था और वे नियमित रूप से चर्च जाने लगे थे। हालांकि, धर्म परिवर्तन के बाद भी जीवन में कोई अपेक्षित बदलाव नहीं आया।
आत्ममंथन के बाद उन्होंने अपनी मूल संस्कृति में लौटने की इच्छा ग्रामीणों के सामने जताई, जिसे समाज ने सहर्ष स्वीकार किया। कार्यक्रम में 'हो' समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड ने कहा कि अपनी प्राचीन परंपरा और धार्मिक आस्था ही आदिवासियों की असली पहचान है।
अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी ने युवाओं से अपनी संस्कृति को समझने के लिए सामाजिक सम्मेलनों में भाग लेने की अपील की। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों को पारंपरिक वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।