जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का आपराधिक साम्राज्य सिर्फ सड़कों और गलियों तक सीमित नहीं था। जमशेदपुर की घाघीडीह सेंट्रल जेल में बंद रहने के दौरान भी वह सलाखों के पीछे से ही अपने खौफनाक गैंग की कमान संभालता रहा।
हत्या की साजिशें रचना, कारोबारियों से रंगदारी वसूलना, अत्याधुनिक हथियारों की खरीद-बिक्री करना, शूटरों को नए निर्देश देना और पूरे आपराधिक नेटवर्क को संचालित करने का यह खतरनाक खेल जेल के भीतर से ही बेखौफ चलाया जाता था।
जेल के अंदर से लगातार आपराधिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतों के बाद परसुडीह थाना पुलिस ने सुजीत सिन्हा को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की थी।
तीन दिनों की गहन पूछताछ के दौरान उसने ऐसे-ऐसे सनसनीखेज खुलासे किए, जिन्हें सुनकर पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए थे।
जेल में छापेमारी के दौरान उसके पास से 12 से अधिक मोबाइल सिम कार्ड जब्त किए गए थे, जो दूसरों के नामों पर फर्जी तरीके से जारी कराए गए थे।
एके-47 से होनी थी अखिलेश की हत्या, पुलिस ने विफल की साजिश
पुलिस रिमांड के दौरान सुजीत सिन्हा ने खुलासा किया था कि कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह की हत्या की पूरी योजना उसके ही एक पूर्व करीबी सुधीर दुबे ने बनाई थी।
सुधीर दुबे मूल रूप से बिहार के बक्सर जिले के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र स्थित ढकाइच का निवासी है। इस हाई प्रोफाइल हत्या को अंजाम देने के लिए नागालैंड से एक एके-47 राइफल और चार अत्याधुनिक पिस्तौलें मंगाई गई थीं।
इन पिस्तौलों में दो बरेटा और दो 200 जेड कंपनी की पिस्तौलें शामिल थीं, जिन्हें लगभग साढ़े तीन-तीन लाख रुपये की भारी-भरकम राशि में खरीदा गया था।
सुजीत द्वारा किए गए इस बड़े खुलासे के बाद पुलिस तुरंत हरकत में आई और पूरी साजिश को समय रहते पूरी तरह विफल कर दिया। वर्तमान में कुख्यात अखिलेश सिंह दुमका जेल में बंद है।
पुलिस के अनुसार, सोनारी निवासी अमित सिंह की हत्या और साकची में हुई गोलीबारी समेत सुधीर दुबे के खिलाफ एक दर्जन से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
कभी अखिलेश सिंह का सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगी रहा सुधीर बाद में गिरोह के वर्चस्व और विवाद के कारण उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन गया था।
सीआईडी की प्राथमिकी से खुला था जेल से चल रहे गैंग का राज
घाघीडीह जेल के भीतर से गिरोह का संचालन करने, हत्याओं की योजना बनाने और व्यवसायियों से रंगदारी मांगने के इस गंभीर मामले में सीआईडी (CID) के तत्कालीन डीएसपी अनिमेष गुप्ता ने नवंबर 2019 में परसुडीह थाने में एक औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पुलिस रिमांड के दौरान सुजीत ने अपने गिरोह की अंदरूनी कार्यप्रणाली, हथियारों की अवैध आपूर्ति श्रृंखला और झारखंड के विभिन्न आपराधिक नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण राज बेपर्दा किए थे।
उल्लेखनीय है कि कुख्यात अखिलेश सिंह को 11 अक्टूबर 2017 को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर जमशेदपुर लाया गया था।
वहीं, जेल के भीतर सुजीत सिन्हा की बढ़ती आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए जून 2021 में उसे घाघीडीह सेंट्रल जेल से धनबाद जेल स्थानांतरित कर दिया गया था।
कोल्हान से लेकर पूरे राज्य तक फैला था सुजीत का आपराधिक नेटवर्क
पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, सुजीत सिन्हा के गिरोह का तंत्र काफी व्यापक था। उसके गैंग में कृणाल सिंह, सोनू सिंह, विकास सिंह, सेंटी उर्फ अभिजीत सिंह, अमन साव, विशाल सिंह, साहिल मलिक, बबलू खान, हरि तिवारी, मुकेश कुमार, आशीष साहू, शोएब अंसारी, रिजवान अंसारी, प्रदीप तिवारी, इमरान उर्फ साहिल और बबलू अंसारी जैसे कई इनामी व खूंखार अपराधी शामिल थे।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर जमशेदपुर के टुइलाडूंगरी निवासी दशरथ सिंह, टेल्को लक्ष्मीनगर का आकाश कुमार सिंह, केबल टाउन का राजेश और गाढ़ाबासा निवासी रवि उर्फ गोपला भी इस नेटवर्क के सक्रिय सदस्य थे।
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि वांटेड अपराधी प्रिंस खान के साथ साठगांठ कर यह गिरोह पूरे कोल्हान प्रमंडल में बेहद सक्रिय था। इस गिरोह के कई सदस्य पड़ोसी जिले सरायकेला-खरसावां से भी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए थे।
हरेराम सिंह रंगदारी कांड और फर्जी सिम नेटवर्क का पर्दाफाश
भुइयांडीह निवासी प्रमुख कारोबारी हरेराम सिंह से दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और उनके आवास पर ताबड़तोड़ फायरिंग कराने की साजिश में भी सुजीत सिन्हा का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया था।
जांच में इस बात का खुलासा हुआ था कि पलामू जेल में बंद रहने के दौरान उसने दशरथ शुक्ला के कहने पर इस पूरी वारदात का ताना-बाना बुना था।
जेल के भीतर रहकर रंगदारी का सिंडिकेट चलाने के लिए सुजीत सिन्हा पूरी तरह से फर्जी सिम कार्ड पर निर्भर था। वर्ष 2018 में उसके गुर्गे आकाश राय को बिष्टुपुर इलाके से गिरफ्तार किया गया था।
इसके बाद उसकी पत्नी रिया सिन्हा के मौसेरे भाई बिट्टू कुमार को भी पुलिस ने अपनी गिरफ्त में लिया। गहन जांच में सामने आया कि अपराधियों को फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड मुहैया कराने में सिदगोड़ा बागुनहातु निवासी पीडीएस दुकानदार सचिन कुमार दास की मुख्य भूमिका थी।
फैक्ट फाइल: सुजीत सिन्हा गैंग का घटनाक्रम
- 2017 - 2020: जमशेदपुर की घाघीडीह सेंट्रल जेल से गैंग का निर्बाध संचालन।
- नवंबर 2019: सीआईडी (CID) ने परसुडीह थाने में आधिकारिक प्राथमिकी दर्ज की।
- तीन दिन की पुलिस रिमांड: मर्डर प्लानिंग, हथियारों की खरीद और रंगदारी नेटवर्क के बड़े राज उजागर।
- AK-47 और 4 अत्याधुनिक पिस्तौल: दुमका जेल में बंद अखिलेश सिंह की हत्या के लिए नागालैंड से मंगाए गए थे हथियार।
- कोल्हान में फैला साम्राज्य: जमशेदपुर, सरायकेला और पलामू समेत कई जिलों में सक्रिय थे शूटर और गुर्गे।
- फर्जी सिम रैकेट का भंडाफोड़: फर्जी दस्तावेजों के सिम से जेल के अंदर से कारोबारियों को दी जाती थी धमकियां।