स्वर्णरेखा नदी के कटाव से दहशत में मालिंचा गांव, खेत-खलिहान और घर नदी में समाए; स्थायी तटबंध निर्माण की मांग
झाड़ग्राम के मालिंचा गांव में स्वर्णरेखा नदी के भीषण कटाव से ग्रामीणों में दहशत है, जहां उपजाऊ भूमि और घर नदी में समा रहे हैं। ग्रामीण अवैध बालू खनन औ ...और पढ़ें

मालिंचा गांव में स्वर्णरेखा नदी का कटाव ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है।
HighLights
मालिंचा गांव में स्वर्णरेखा नदी का भीषण कटाव जारी।
अवैध बालू खनन और प्रशासनिक उपेक्षा मुख्य कारण।
ग्रामीणों ने स्थायी तटबंध और मुआवजे की मांग की।
संवाद सूत्र, खड़गपुर। झाड़ग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर-2 प्रखंड अंतर्गत मालिंचा गांव में स्वर्णरेखा नदी का भीषण कटाव ग्रामीणों के लिए काल बन गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदी का जलस्तर उफान पर है, जिससे तटवर्ती इलाकों में तेजी से मिट्टी धंस रही है।
कटाव की चपेट में आकर अब तक कई एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि, आवासीय भूखंड और विशाल पेड़ नदी में समा चुके हैं। कई मकान अब मुहाने पर खड़े हैं, जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल है।
रातभर पहरा देने को मजबूर ग्रामीण
नदी किनारे रहने वाले परिवार असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं। रात के अंधेरे में मिट्टी टूटने की डरावनी आवाजों के कारण लोगों की नींद उड़ गई है।
एहतियात के तौर पर ग्रामीण अपने जरूरी दस्तावेज और कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर भेज रहे हैं। किसानों की उपजाऊ जमीन छिन जाने से उनकी आजीविका पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
प्रशासनिक उपेक्षा और अवैध बालू खनन पर फूटा गुस्सा
ग्रामीणों का आरोप है कि हर मानसून में प्रशासन और जनप्रतिनिधि केवल खोखले आश्वासन देते हैं। बारिश बीतते ही सभी वादे कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
ग्रामीणों ने स्थिति के विकराल होने का मुख्य कारण नदी से हो रहे अवैध बालू खनन को बताया है। अनियंत्रित बालू निकासी से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बिगड़ा है, तल गहरा हुआ है और किनारे कमजोर हो गए हैं।
भाजपा नेता ने लिया जायजा, उठी स्थायी तटबंध की मांग
स्थिति का जायजा लेने पहुंचे नयाग्राम-5 मंडल भाजपा अध्यक्ष तापस सुई ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस गंभीर मुद्दे को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाकर स्थायी समाधान की मांग की जाएगी।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
- स्वर्णरेखा नदी पर अविलंब स्थायी तटबंध का निर्माण कराया जाए।
- नदी में जारी अवैध बालू खनन पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगे।
- प्रभावित किसानों और बेघर हो रहे परिवारों को राहत व मुआवजा दिया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो पूरा मालिंचा गांव स्वर्णरेखा नदी के आगोश में समा जाएगा।