इंडस्ट्रियल कैपिटल से स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग तक: जानिए जमशेदपुर में कैसे रचा गया टाटा मोटर्स का इतिहास
जमशेदपुर में 1945 में शुरू हुई टाटा मोटर्स की यात्रा लोकोमोटिव निर्माण से लेकर आज इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों तक पहुंच गई है। ...और पढ़ें

वर्ष 1954 में जर्मनी की प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी डेमलर-बेंज के साथ ऐतिहासिक साझेदारी कर टेल्को ने भारत में व्यावसायिक ट्रकों का निर्माण शुरू किया।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। वर्ष 1945 में जमशेदपुर स्थित पुराने ईस्ट इंडियन रेलवे वर्कशॉप से शुरू हुई टाटा मोटर्स (तत्कालीन टेल्को) की यात्रा आज भारत की सबसे बड़ी और विश्वसनीय ऑटोमोबाइल कंपनियों में शामिल हो चुकी है।
रेलवे उपकरण और लोकोमोटिव निर्माण से अपनी शुरुआत करने वाली इस दिग्गज कंपनी ने आज इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), हाइड्रोजन तकनीक, ऑटोमेशन और वैश्विक निर्यात बाजार में अपनी एक मजबूत पहचान स्थापित कर ली है।
आठ दशकों की इस निरंतर यात्रा में कंपनी ने न केवल भारतीय परिवहन व्यवस्था को एक नई दिशा दी, बल्कि जमशेदपुर शहर को देश की औद्योगिक राजधानी के रूप में स्थापित करने में भी सर्वोपरि भूमिका निभाई।
1945: लोकोमोटिव निर्माण से हुई थी शुरुआत

द्वितीय विश्व युद्ध के ठीक बाद टाटा समूह के तत्कालीन चेयरमैन जेआरडी टाटा ने स्वतंत्र भारत की भावी औद्योगिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए टाटा लोकोमोटिव एंड इंजीनियरिंग कंपनी (टेल्को) की स्थापना की थी।
इसकी कमान सुमंत मूलगांवकर को सौंपी गई। शुरुआती दौर में कंपनी का मुख्य ध्यान लोकोमोटिव (रेल इंजन), बॉयलर, रोड रोलर और रेलवे वैगन बनाने पर केंद्रित था।
अपनी स्थापना के महज दस वर्षों के भीतर कंपनी ने भारतीय रेलवे के लिए 1,000 से अधिक लोकोमोटिव तैयार कर इतिहास रच दिया था।
1954: ट्रकों के निर्माण से बदली औद्योगिक पहचान
वर्ष 1954 में जर्मनी की प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी डेमलर-बेंज के साथ ऐतिहासिक साझेदारी कर टेल्को ने भारत में व्यावसायिक ट्रकों का निर्माण शुरू किया।
टाटा मर्सिडीज बेंज के नाम से बने इन ट्रकों ने भारतीय सड़कों पर अपनी मजबूती और विश्वसनीयता साबित की। 1955 में तीन ट्रकों ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा से भारत के मुंबई तक लगभग 12,875 किलोमीटर की ऐतिहासिक अंतरमहाद्वीपीय यात्रा बिना किसी यांत्रिक खराबी के पूरी की, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग की ओर खींचा।
1960-70: वैश्विक विस्तार और अनुसंधान का दौर

1960 के दशक में कंपनी ने श्रीलंका को अपना पहला ट्रक निर्यात कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखा और जमशेदपुर में अपना पहला रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर स्थापित किया।
धीरे-धीरे वाहनों का उत्पादन रेलवे लोकोमोटिव से अधिक होने लगा, जिसके बाद कंपनी का नाम बदलकर टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (टेल्को) कर दिया गया।
वर्ष 1970 में अंतिम लोकोमोटिव का निर्माण करने के बाद कंपनी पूरी तरह से कमर्शियल वाहनों के निर्माण पर केंद्रित हो गई।
1980-90: यात्री वाहनों में नई क्रांति
1986 में भारत का पहला स्वदेशी लाइट कमर्शियल वाहन टाटा 407 लॉन्च हुआ, जिसने देश में माल ढुलाई की पूरी तस्वीर ही बदल दी। इसके बाद कंपनी ने पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में कदम रखा।
टाटा सिएरा, सफारी, सूमो और अंततः टाटा इंडिका जैसी गाड़ियों ने भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में एक नया अध्याय लिखा। 1998 में लॉन्च हुई टाटा इंडिका भारत की पहली पूर्णतः स्वदेशी यात्री कार बनी।
डीजल से इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन तकनीक तक का सफर
आज टाटा मोटर्स केवल पारंपरिक डीजल और पेट्रोल वाहनों तक सीमित नहीं है। कंपनी भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की अग्रणी निर्माता बन चुकी है।
अब कंपनी पर्यावरण अनुकूल परिवहन के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल और हाइड्रोजन इंटरनल कम्बशन इंजन ($H_2$-ICE) तकनीक पर आधारित भारी ट्रकों का अत्याधुनिक परीक्षण कर रही है।
स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित परिवहन की दिशा में इसे भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
ऑटोमेशन और बदलती मैन्युफैक्चरिंग प्रणाली
जमशेदपुर प्लांट में रोबोटिक्स, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेटेड असेंबली लाइन्स का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
इससे उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और कार्यस्थल की सुरक्षा में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कर्मचारियों को पारंपरिक कौशल के बजाय रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर, बैटरी तकनीक और डेटा-आधारित उत्पादन प्रणाली से लैस किया जा रहा है।
जमशेदपुर प्लांट: आज भी टाटा मोटर्स की सबसे बड़ी ताकत
पुणे, लखनऊ, धारवाड़, साणंद और विदेशों में कई आधुनिक संयंत्र स्थापित होने के बावजूद जमशेदपुर प्लांट आज भी टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहन कारोबार की सबसे मजबूत नींव है।
यहां निर्मित ट्रक और भारी वाहन देश के कोने-कोने के अलावा दुनिया के अनेक देशों में निर्यात किए जाते हैं। बदलती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच जमशेदपुर प्लांट अब एक पारंपरिक विनिर्माण इकाई से आगे बढ़कर भविष्य की स्मार्ट, डिजिटल और ग्रीन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का एक प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।