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चंद्रशेखरन के बाद टाटा समूह का अगला बॉस कौन होगा? नोएल टाटा, सौरभ अग्रवाल या टीवी नरेंद्रन

Published: Wed, 12 Aug 2026 03:40 PM (IST)

एन चंद्रशेखरन के 2027 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने के बाद नए प्रमुख की तलाश तेज हो ...और पढ़ें

जमशेदपुर में टाटा स्टील के हेड रहे टीवी नरेंद्रन का भी नाम रेस में।

जमशेदपुर में टाटा स्टील के हेड रहे टीवी नरेंद्रन का भी नाम रेस में।

HighLights

  1. एन चंद्रशेखरन 2027 में टाटा संस चेयरमैन पद छोड़ेंगे।

  2. नोएल टाटा, सौरभ अग्रवाल, टीवी नरेंद्रन प्रमुख दावेदार।

  3. नए नेतृत्व मॉडल या बाहरी विशेषज्ञ पर भी विचार।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। एन चंद्रशेखरन के अचानक इस्तीफे के बाद 400 अरब डालर वाले टाटा समूह के नए बास की तलाश तेज हो गई है। बुधवार को उनके 2027 में पद छोड़ने के एलान के साथ ही उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं।

टाटा संस ने आधिकारिक रूप से कोई शार्टलिस्ट जारी नहीं की है, लेकिन नोएल टाटा, सौरभ अग्रवाल और टीवी नरेंद्रन जैसे वरिष्ठ दिग्गजों के नाम प्रमुखता से उभर रहे हैं। नए बास के लिए जिनके नामों की चर्चा है, उनके मजबूत पक्ष इस प्रकार हैं।

टाटा स्टील कारपोरेट कम्युनिकेशंस के पूर्व हेड प्रभात शर्मा के नाम नोएल टाटा सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं, लेकिन टीवी नरेंद्रन भी रेस में हैं।

नोएल टाटा : संस्थागत दावेदारी में सबसे आगे

इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार नोएल टाटा हैं। रतन टाटा के निधन के बाद वे टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं, जिसकी टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ट्रेंट लिमिटेड (वेस्टसाइड, जूडियो) की शानदार सफलता भी उनके पक्ष में है। हालांकि, माना जा रहा है कि वे सारी शक्तियां खुद रखने के बजाय गैर-कार्यकारी चेयरमैन की भूमिका चुन सकते हैं और रोजमर्रा के संचालन के लिए सीईओ-एमडी का नया मॉडल लागू कर सकते हैं।

सौरभ अग्रवाल : वित्तीय अनुशासन के माहिर

टाटा संस के ग्रुप सीएफओ सौरभ अग्रवाल एक मजबूत अंदरूनी विकल्प हैं। चंद्रशेखरन के कार्यकाल में एयर इंडिया, सेमीकंडक्टर और डिजिटल कारोबार में हुए भारी निवेश के दौरान पूंजी जुटाने और कर्ज नियंत्रण में उनकी अहम भूमिका रही है। मौजूदा समय में समूह को कड़े वित्तीय अनुशासन की जरूरत है, जिसके लिए अग्रवाल बिल्कुल उपयुक्त हैं। हालांकि, किसी बड़ी कंपनी के मुख्य कार्यकारी (सीईओ) के तौर पर अनुभव की कमी उनकी दावेदारी में एकमात्र बाधा है।

टीवी नरेंद्रन : औद्योगिक नेतृत्व का बड़ा चेहरा

टाटा स्टील के ग्लोबल सीईओ व एमडी टीवी नरेंद्रन के पास लंबा और ठोस औद्योगिक अनुभव है। 1988 से टाटा से जुड़े नरेंद्रन ने कंपनी का कर्ज घटाने, भारत में क्षमता बढ़ाने और ग्रीन स्टील तकनीक में शानदार काम किया है। समूह के आगामी औद्योगिक विस्तार के लिए उनका तजुर्बा बेहद काम का है। हालांकि, उनकी विशेषज्ञता मुख्यतः भारी उद्योग तक सीमित है, जबकि समूह को अब विमानन और डिजिटल जैसे नए वैश्विक कारोबार का भी अनुभव चाहिए।

बाहरी चेहरा और नया नेतृत्व मॉडल

टाटा का कारोबार 100 से अधिक देशों में फैल चुका है, ऐसे में किसी वैश्विक तकनीक, वित्त या विमानन विशेषज्ञ (बाहरी व्यक्ति) को भी कमान मिल सकती है। 2017 में भी बाहरी नामों पर विचार हुआ था। लेकिन नए बास को टाटा ट्रस्ट के मूल्यों के साथ तालमेल बिठाना होगा। प्रबल संभावना यह भी है कि समूह एक नए नेतृत्व मॉडल को अपनाए, जिसमें नोएल गैर-कार्यकारी चेयरमैन बनें और संचालन किसी पेशेवर सीईओ को सौंप दिया जाए।

इंटर्न से टाटा बॉस तक: एन चंद्रशेखरन का शानदार सफर रहा

टाटा संस के बास पद से अपनी विदाई की घोषणा कर कार्पोरेट जगत को चौंकाने वाले एन चंद्रशेखरन का करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। एक आम सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में इंटर्न के रूप में जुड़ने और फिर 400 अरब डालर के टाटा साम्राज्य का बास बनने तक की उनकी कहानी बेमिसाल है।

  • 1963: दो जून को तमिलनाडु के नमक्कल जिले में जन्म। शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की। कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए) में मास्टर डिग्री ली।
  • 1987: 27 जनवरी को टीसीएस (टीसीएस) में एक इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की।
  • 2007: अपनी मेहनत और विजन से सितंबर में टीसीएस के बोर्ड में जगह बनाई। चीफ आपरेटिंग आफिसर (सीओओ) बने।
  • 2009: छह अक्टूबर को टीसीएस के सीईओ और एमडी का अहम पद संभाला। कंपनी को वैश्विक मंदी से उबारकर मजबूत किया।
  • 2012-13: आइटी उद्योग के प्रतिष्ठित संगठन नासकाम के चेयरमैन बने।
  • 2016: साइरस मिस्त्री विवाद के बाद अक्टूबर में चंद्रशेखरन को टाटा संस के बोर्ड में शामिल किया गया।
  • 2017: फरवरी में टाटा संस के चेयरमैन बने। वे इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाले पहले गैर-पारसी और गैर-टाटा पेशेवर थे।
  • 2022: चेयरमैन के तौर पर दूसरा कार्यकाल मिला। एयर इंडिया का अधिग्रहण पूरा किया। व्यापार और उद्योग में योगदान के लिए ''पद्म भूषण'' से सम्मानित।
  • 2024: अक्टूबर में रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट के नए बास नोएल टाटा के साथ तालमेल की चुनौती शुरू हुई।
  • फरवरी 2026: निवेश और कर्ज की नीतियों पर नोएल टाटा के विरोध के कारण बोर्ड ने तीसरे कार्यकाल पर फैसला टाल दिया।
  • 12 अगस्त 2026: चंद्रशेखरन ने तीसरी पारी खेलने से इनकार किया और बोर्ड को पद छोड़ने की जानकारी दी।
  • 20 फरवरी 2027: इस दिन चंद्रशेखरन का टाटा संस के चेयरमैन के रूप में कार्यकाल औपचारिक रूप से खत्म हो जाएगा।

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