बैंकिंग और IT के दम पर देश में CSR खर्च 17% बढ़ा, लेकिन स्टील सेक्टर के दबाव से घटा टाटा स्टील का बजट
वैश्विक मंदी और स्टील सेक्टर के दबाव के कारण टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने सीएसआर बजट में 19% की कटौती की है, जो 585 करोड़ से घटकर 473 ...और पढ़ें

टाटा स्टील ने CSR बजट 112 करोड़ रुपये घटाया: स्टील सेक्टर के दबाव से 19% कम हुआ सामाजिक खर्च, फिर भी लाखों लोगों को सीधा फायदा।
HighLights
टाटा स्टील का सीएसआर बजट 19% घटकर 473 करोड़ हुआ।
वैश्विक मंदी और स्टील सेक्टर के दबाव से हुई कटौती।
बजट कटौती के बावजूद 69 लाख लोग हुए लाभान्वित।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। वैश्विक मंदी और स्टील सेक्टर पर बने दबाव का असर अब कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड पर भी दिखने लगा है।
टाटा स्टील ने अपने सामाजिक विकास बजट में बड़ी कटौती की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का कुल CSR व्यय पिछले साल के 585 करोड़ रुपये से करीब 19 प्रतिशत घटकर 473 करोड़ रुपये रह गया है।
बजट में कटौती के पीछे का कारण
सीधे तौर पर बजट में 112 करोड़ रुपये की यह कमी मेटल और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में आई सुस्ती का सीधा परिणाम है।
मेटल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई मंदी के चलते इस साल कई प्रमुख औद्योगिक कंपनियों ने अपने सीएसआर आवंटन में कटौती की है।
हालांकि, बैंकिंग और आईटी क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन के कारण राष्ट्रीय स्तर पर कुल सीएसआर फंड में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्रभाव में कमी नहीं, 69 लाख लोगों को मिला लाभ
बजट में आई इस कमी के बावजूद टाटा स्टील फाउंडेशन के माध्यम से चलाए जा रहे जन-कल्याणकारी कार्यों का दायरा बेहद व्यापक रहा।
स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका जैसी पहलों से झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित छह राज्यों के करीब 69 लाख लोग सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं।
कंपनी ने अपने फाउंडेशन के जरिए 480 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से 80 करोड़ रुपये अतिरिक्त जुटाए।
जमशेदपुर स्थित 1,000 बेड वाला टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) और वंचित बच्चों के लिए संचालित 'मस्ती की पाठशाला' जैसी पहल इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
देश में CSR खर्च की राष्ट्रीय स्थिति
वित्तीय वर्ष 2025-26 में निफ्टी-50 की शीर्ष 46 कंपनियों द्वारा सीएसआर पर किया गया कुल खर्च 17 प्रतिशत बढ़कर 11,391 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें से लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा (5,143 करोड़ रुपये) देश के पांच बड़े कॉर्पोरेट दिग्गजों का रहा:
- HDFC बैंक: ₹1,316 करोड़ (देश में सबसे आगे)
- रिलायंस इंडस्ट्रीज: ₹1,223 करोड़
- TCS: ₹1,017 करोड़
- ICICI बैंक: ₹878 करोड़
- SBI: ₹709 करोड़
देश भर में CSR का बढ़ता दायरा
संसद के मानसून सत्र में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देश में CSR खर्च बीते पांच वर्षों में 57 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 21 के 26,211 करोड़ रुपये से वित्त वर्ष 25 में 40,794 करोड़ रुपये हो गया है।
इन पांच वर्षों में महाराष्ट्र (₹29,511 करोड़) सबसे अधिक सीएसआर फंड प्राप्त करने वाला राज्य रहा, जबकि गुजरात दूसरे स्थान पर रहा। इस पूरे फंड का सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिला है।