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    टाटानगर स्टेशन पर 70.91 लाख से सुधरेंगी सुविधाएं: प्लेटफॉर्म 4-5 का विस्तार और नया पार्सल प्लेटफॉर्म बनेगा

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 10:31 PM (GMT+05:30)

    चक्रधरपुर मंडल ने टाटानगर रेलवे स्टेशन पर 70.91 लाख रुपये का ई-टेंडर जारी किया है। इसके तहत प्लेटफॉर्म 4-5 का विस्तार और खड़गपुर छोर पर नया पार्सल प्ल ...और पढ़ें

    निर्माण कार्य में इस्‍तेमाल होने वाले सीमेंट, सरिया, रेत और गिट्टी की जांच आईआईटी या NABL से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से करानी होगी।

    निर्माण कार्य में इस्‍तेमाल होने वाले सीमेंट, सरिया, रेत और गिट्टी की जांच आईआईटी या NABL से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से करानी होगी।

    HighLights

    1. प्लेटफॉर्म 4-5 का विस्तार, नया पार्सल प्लेटफॉर्म बनेगा।

    2. यात्री सुविधा बढ़ेगी, भीड़ घटेगी, माल ढुलाई सुधरेगी।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटानगर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा और माल ढुलाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चक्रधरपुर मंडल ने 70.91 लाख रुपये का ई-टेंडर जारी किया है। 
     
    इस परियोजना के तहत प्लेटफॉर्म संख्या चार व पांच का विस्तार किया जाएगा और खड़गपुर छोर पर एक नया पार्सल प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा।

    रेलवे द्वारा जारी इस निविदा को 26 अगस्त को खोला जाएगा। संपूर्ण निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए छह महीने की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

    प्लेटफॉर्म 4 और 5 के विस्तार से लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन और हैंडलिंग में काफी सुगमता आएगी। वहीं, लाइन संख्या छह और सात के बीच बनने वाला नया पार्सल प्लेटफॉर्म माल लदान को यात्री क्षेत्रों से अलग करेगा। 
     
    इससे मुख्य प्लेटफॉर्मों पर भीड़ का दबाव घटेगा और स्टेशन की समग्र परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी। निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त मानक तय किए गए हैं। 
     
    टेंडर की शर्तों के अनुसार, ठेकेदार को इस्तेमाल होने वाले सीमेंट, सरिया, रेत और गिट्टी की जांच IIT, NIT या NABL से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से करानी होगी। 
     
    इसके अलावा, कार्यस्थल पर एक गुणवत्ता नियंत्रण लैब स्थापित करना अनिवार्य होगा। ठेकेदार को निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले छह महीनों तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालनी होगी। 
     
    रेल प्रशासन के अनुसार, यह परियोजना भविष्य में बढ़ते रेल यातायात और लंबी ट्रेनों के बेहतर प्रबंधन में मील का पत्थर साबित होगी।