प्रेमानंद महाराज के लिए जमशेदपुर के विवेक ने बनाया चार लाख मोतियों से राधा-कृष्ण का पोर्ट्रेट, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड
आदित्यपुर के कलाकार विवेक मिश्रा ने चार लाख मोतियों से राधा-कृष्ण का 11x7 फीट का सबसे बड़ा आध्यात्मिक पोर्ट्रेट बनाकर वर्ल्ड रिकार्ड्स इंडिया में नाम ...और पढ़ें

आदित्यपुर के विवेक का कमाल, मोती पोर्ट्रेट को वर्ल्ड रिकार्ड्स इंडिया ने दी आधिकारिक मान्यता।
HighLights
विवेक मिश्रा ने बनाया राधा-कृष्ण का सबसे बड़ा मोती पोर्ट्रेट।
चार लाख मोतियों से निर्मित, 11x7 फीट का विशाल चित्र।
27 जुलाई को वृंदावन में प्रेमानंद महाराज को समर्पित करेंगे।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। आदित्यपुर के आदित्य सिंडिकेट निवासी युवा कलाकार विवेक मिश्रा ने कला और भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हुए भगवान श्री राधा-कृष्ण का विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक मोती पोर्ट्रेट तैयार कर नया विश्व रिकार्ड बनाया है।
11 गुणा 7 फीट आकार के इस विशाल पोर्ट्रेट को करीब चार लाख क्रिस्टल और मैट मोतियों से तैयार किया गया है। विवेक की इस अनूठी कलाकृति को वर्ल्ड रिकार्ड्स इंडिया ने आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान करते हुए विश्व रिकार्ड प्रमाणपत्र, पदक और सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया है।
इस दिव्य पोर्ट्रेट को तैयार करने में विवेक मिश्रा को तीन महीने से अधिक समय लगा। सैकड़ों घंटे की मेहनत, धैर्य और एकाग्रता के साथ उन्होंने एक-एक मोती को कलात्मक ढंग से सजाकर भगवान श्री राधा-कृष्ण की मनोहारी छवि को आकार दिया।
पोर्ट्रेट की विशालता और इसमें इस्तेमाल किए गए लाखों के करीब मोतियों की बारीक सज्जा इसे विशेष बनाती है। यह कृति देखने में जितनी आकर्षक है, उतनी ही इसके पीछे कलाकार की श्रद्धा और साधना भी जुड़ी हुई है।
वृंदावन में प्रेमानंद महाराज को समर्पित करेंगे
विवेक मिश्रा ने बताया कि उन्होंने इस पोर्ट्रेट का निर्माण केवल विश्व रिकार्ड बनाने के उद्देश्य से नहीं किया, बल्कि भगवान श्री राधा-कृष्ण के प्रति अपनी आस्था और भक्ति को समर्पित करने के भाव से किया है।
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उनकी इच्छा है कि यह दिव्य कलाकृति प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश लोगों तक पहुंचाए। इसी उद्देश्य से विवेक मिश्रा 27 जुलाई को जमशेदपुर से वृंदावन के लिए रवाना होंगे। वहां वे विश्व रिकार्ड से सम्मानित इस पोर्ट्रेट को प्रेमानंद महाराज के श्रीचरणों में विनम्र सेवा और श्रद्धा स्वरूप समर्पित करेंगे।
उनका कहना है कि यह उनके लिए गौरव और सौभाग्य का क्षण होगा। विवेक मिश्रा की इस उपलब्धि से आदित्यपुर, जमशेदपुर और पूरे झारखंड का नाम गौरवान्वित हुआ है। उनकी यह कृति कला, आस्था, मेहनत और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।