25 साल तक रोज पी सिगरेट, धुएं में उड़ गए 9 लाख रुपये; अब कैंसर इलाज के लिए बिक रही जमशेदपुर के रोहित की संपत्ति
World No-Tobacco Day: रोहित कर्मकार ने 25 साल तक सिगरेट पीकर 9 लाख रुपये से अधिक खर्च किए, जिससे उन्हें कैंसर हो गया और अब परिवार इलाज के लिए संपत्ति ...और पढ़ें

अस्पताल में चल रहा इलाज। (जागरण)
HighLights
रोहित कर्मकार ने 25 साल सिगरेट पीकर 9 लाख उड़ाए।
अब कैंसर के इलाज के लिए परिवार संपत्ति बेच रहा है।
तंबाकू से कैंसर के मामले बढ़ रहे, इलाज महंगा।
अमित तिवारी, जमशेदपुर। अगर समय रहते सिगरेट छोड़ देता तो शायद आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। कैंसर से जूझ रहे परसुडीह निवासी रोहित कर्मकार की यह पीड़ा तंबाकू की लत की भयावह सच्चाई को सामने लाती है।
वर्षों तक सिगरेट पीने की आदत ने न केवल उनकी सेहत को बर्बाद किया, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी डगमगा दी। अब इलाज के लिए परिवार को अपनी संपत्ति बेचने तक की नौबत आ गई है।
रोहित कर्मकार पिछले करीब 25 वर्षों से नियमित रूप से सिगरेट का सेवन कर रहे थे। शुरुआत शौक के तौर पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल गई। प्रतिदिन लगभग 100 रुपये सिगरेट पर खर्च होते थे।
इस हिसाब से उन्होंने 25 वर्षों में करीब 9.12 लाख रुपये केवल धुएं में उड़ा दिए। यदि यही राशि किसी बचत योजना, बैंक एफडी या म्यूचुअल फंड में निवेश की जाती तो यह रकम कई गुना बढ़ सकती थी।
कुछ महीने पहले उन्हें मुंह में लगातार घाव और दर्द की शिकायत हुई। जांच कराने पर कैंसर की पुष्टि हुई। अब इलाज में लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं और परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
तंबाकू से क्यों होता है कैंसर?
मेहरबाई टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (एमटीएमएच) के रेडियेशन आंकोलाजी विभाग के प्रमुख डॉ. स्नेहा झा ने बताया कि तंबाकू में 7,000 से अधिक रसायन पाए जाते हैं।
इनमें कम से कम 70 ऐसे रसायन हैं जिन्हें कैंसर पैदा करने वाला माना जाता है। निकोटिन, टार, बेंजीन, फार्मल्डिहाइड और आर्सेनिक जैसे तत्व शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
लंबे समय तक सेवन करने पर मुंह, जीभ, गला, स्वरयंत्र, फेफड़े और भोजन नली की कोशिकाओं में असामान्य परिवर्तन होने लगते हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं।
बढ़ रहे कैंसर मरीज, आंकड़े कर रहे आगाह
एमटीएमएच के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2020-21 में अस्पताल की ओपीडी में 26,167 मरीज पहुंचे। 2021-22 में यह संख्या 26,257 रही। 2023-24 में 23,800 और 2024-25 में 25,365 मरीजों ने ओपीडी सेवाएं लीं।
इन चार वर्षों में कुल 1,01,589 मरीज अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर के कुल मामलों में बड़ी हिस्सेदारी मुंह और गले के कैंसर की होती है, जिसके पीछे तंबाकू, गुटखा, खैनी और धूम्रपान प्रमुख कारण हैं।
इलाज का खर्च तोड़ देता है परिवार की कमर
कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर के इलाज में 5 लाख से 20 लाख रुपये या उससे अधिक खर्च हो सकते हैं। कई परिवारों को जमीन, गहने या अन्य संपत्तियां बेचनी पड़ती हैं।
बीमारी के कारण मरीज की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है, जिससे आय का स्रोत कमजोर पड़ जाता है। ऐसे में तंबाकू छोड़ना केवल स्वास्थ्य की सुरक्षा नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा भी है। आज छोड़ी गई सिगरेट भविष्य में लाखों रुपये और अनमोल जिंदगी दोनों बचा सकती है।
धुएं में उड़ता पैसा
| प्रतिदिन सिगरेट पर खर्च | ₹100 |
| प्रति माह खर्च | ₹3,000 |
| प्रति वर्ष खर्च | ₹36,500 |
| 10 वर्ष में कुल खर्च | ₹3.65 लाख |
| 25 वर्ष में कुल खर्च | ₹9.12 लाख |
| कैंसर इलाज का संभावित खर्च : ₹5 लाख से ₹20 लाख या उससे अधिक | |
यह भी पढ़ें- झारखंड के 76.7% स्कूलों में हो रहा तंबाकू का इस्तेमाल, 11-18 जून तक चलेगा जागरुकता अभियान
तंबाकू केवल कैंसर का कारण नहीं बनता, बल्कि परिवार की आर्थिक रीढ़ भी तोड़ देता है। ऐसे में इसके प्रति लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।
डॉ. स्नेहा झा, रेडियेशन आंकोलॉजी विभागाध्यक्ष, एमटीएमएच