कूरियर का झांसा, फर्जी APK का जाल: जामताड़ा पुलिस ने आंगनबाड़ी से दबोचे 4 शातिर साइबर अपराधी
जामताड़ा में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक आंगनबाड़ी केंद्र से चल रहे ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में चार साइबर ...और पढ़ें

जामताड़ा में आंगनबाड़ी केंद्र से साइबर ठगी का अड्डा ध्वस्त, चार गिरफ्तार
HighLights
आंगनबाड़ी केंद्र से चल रहा था साइबर ठगी का गिरोह।
पुलिस ने चार साइबर अपराधियों को मौके से दबोचा।
फर्जी APK फाइल भेजकर लोगों को ठगते थे अपराधी।
जागरण संवाददाता, जामताड़ा। जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत साइबर अपराध थाना पुलिस ने शुक्रवार को करमाटांड़ थाना क्षेत्र के पिण्डारी स्थित एक आंगनबाड़ी केंद्र में छापामारी कर साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई में चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक आरोपी फरार हो गया।
पुलिस अधीक्षक शंभु कुमार सिंह के निर्देश पर पुलिस उपाधीक्षक (साइबर अपराध) अमित कुमार के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अरबाज अंसारी, शरीफ अंसारी, इरफान अंसारी और फरीद अंसारी के रूप में हुई है।
छापामारी के दौरान पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 11 मोबाइल फोन, 20 सिम कार्ड तथा एक लैपटॉप बरामद किया। इस संबंध में साइबर अपराध थाना कांड संख्या 49/26 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम एवं दूरसंचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य खुद को विभिन्न कूरियर कंपनियों का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद वे पीड़ितों के मोबाइल पर फर्जी APK फाइल भेजकर उसे इंस्टॉल करवाते थे।
फाइल इंस्टॉल होते ही मोबाइल की गोपनीय जानकारी उनके कब्जे में आ जाती थी, जिसके माध्यम से वे साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देते थे। प्रारंभिक जांच में गिरोह का नेटवर्क देश के विभिन्न राज्यों तक फैला होने की बात सामने आई है।
छापामारी दल में साइबर थाना प्रभारी राजेश मंडल, पुलिस निरीक्षक नितिश कुमार, मनीष कुमार गुप्ता, सहायक अवर निरीक्षक हीरालाल महतो तथा रिजर्व गार्ड के जवान शामिल थे। पुलिस फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापामारी कर रही है।
ऐसे करते थे ठगी
- कूरियर कंपनी का कस्टमर केयर अधिकारी बनकर करते थे कॉल।
- मोबाइल पर फर्जी APK फाइल भेजकर इंस्टॉल कराते थे।
- फाइल के जरिए मोबाइल की गोपनीय जानकारी चुराते थे।
- बैंकिंग व अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल कर साइबर ठगी को अंजाम देते थे।