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    खूंटी के लाखों किसानों को झटका, KVK ने कृषि मौसम सलाह सेवा किया बंद; खेती पर संकट

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 12:48 PM (IST)

    खूंटी जिले में कृषि मौसम इकाई की सेवाएं बंद होने से लगभग एक लाख किसान मौसम आधारित परामर्श से वंचित हो गए हैं। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. खूंटी में कृषि मौसम इकाई की सेवाएं बंद हो गईं।

    2. एक लाख किसान मौसम आधारित कृषि परामर्श से वंचित हुए।

    3. खरीफ सीजन में किसानों की मुश्किलें और चिंता बढ़ी।

    सुनील कुमार, तोरपा। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले खूंटी जिले के किसानों को बड़ा झटका लगा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संयुक्त कार्यक्रम के तहत कृषि विज्ञान केंद्र खूंटी से संचालित जिला कृषि मौसम इकाई की सेवाएं बंद हो गई हैं।

    इसके चलते जिले के करीब एक लाख किसान मौसम आधारित कृषि परामर्श से वंचित हो गए हैं। ऐसे समय में जब जिले में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है और अधिकांश किसान वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं, इस निर्णय ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

    पिछले सात वर्षों से कृषि विज्ञान केंद्र खूंटी के माध्यम से किसानों को सप्ताह में दो बार मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि परामर्श उपलब्ध कराया जाता था। किसानों का कहना है कि इस सेवा से उन्हें मौसम के अनुसार खेती की योजना बनाने में काफी मदद मिलती थी और फसल नुकसान भी कम होता था।

    वर्तमान में खरीफ फसलों की बुआई का समय चल रहा है, लेकिन जिले में सामान्य से कम बारिश होने के कारण किसान पहले से ही असमंजस में हैं। ऐसे में मौसम आधारित परामर्श सेवा बंद होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। किसानों का कहना है कि अब उन्हें मौसम संबंधी सटीक जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही है, जिससे खेती का जोखिम बढ़ गया है।

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    क्या कहते है किसान

    कर्रा प्रखंड के बकसपुर पंचायत की मुखिया पूनम बरला ने कहा कि यह सेवा किसानों के लिए बेहद उपयोगी थी। सरकार को इसे तत्काल पुनः शुरू करना चाहिए, ताकि खरीफ सीजन में किसानों को राहत मिल सके।

    तोरपा मुखिया शिशिर तोपनो ने कहा कि पहले पांच दिन पहले तक मौसम की जानकारी मिल जाती थी, जिससे बुआई, सिंचाई और कटाई का सही समय तय करने में आसानी होती थी। अब यह सुविधा बंद होने से खेती पूरी तरह मौसम के भरोसे हो गई है।

    तोरपा निवासी जकरियास तोपनो का कहना है कि जिले के लगभग 70 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत हैं तथा वर्षा आधारित खेती करते हैं। ऐसे में कृषि मौसम इकाई की भूमिका उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण थी।

    क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक

    कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. राजन चौधरी ने कहा कि न्यायालय के निर्देश पर यह सेवा कुछ समय तक जारी रही थी, लेकिन अवधि समाप्त होने के बाद फिर बंद हो गई। यदि केंद्र सरकार या न्यायालय से दोबारा निर्देश मिलता है तो यह सेवा फिर शुरू की जा सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में यह सेवा किसानों के लिए संजीवनी साबित होगी।