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    खूंटी में पुल बिना जोखिम में जान, गर्भवती को कंधों पर बैठाकर पार कराई नदी

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 06:41 AM (IST)

    खूंटी के अड़की प्रखंड में सड़क और पुल के अभाव में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान कंधों पर उठाकर उफनती करकरी नदी पार कर अस्पताल ले जाना पड़ा। ...और पढ़ें

    गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने के लिए कंधे पर उठाकर नदी पार कराते ग्रामीण। (जागरण)

    गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने के लिए कंधे पर उठाकर नदी पार कराते ग्रामीण। (जागरण)

    HighLights

    1. खूंटी में गर्भवती को कंधों पर उठाकर नदी पार कराई।

    2. सड़क और पुल के अभाव में हुई यह घटना।

    3. ग्रामीण वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे।

    संवाद सूत्र, अड़की (खूंटी)। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोगों को किन विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है, इसका ताजा उदाहरण रविवार को खूंटी जिले के अड़की प्रखंड में देखने को मिला।

    यहां तोड़ांग पंचायत के सावमरांगबेड़ा गांव की गर्भवती सोमवारी देवी को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने तथा रास्ते में नदी होने के कारण एंबुलेंस का जाना मुश्किल था।

    गांववालों का किसी अन्य वाहन से महिला को ले जाना संभव नहीं था। मजबूरन परिवार तथा आसपास के लोगों को उन्हें कंधों पर बैठाकर अस्पताल ले जाना पड़ा।

    महिला को कंधे पर बैठाकर पार की नदी

    रास्ते में पानी से भरी करकरी नदी भी ग्रामीणों ने महिला को कंधे पर बैठाकर पैदल ही पार की। बरसात के कारण नदी इन दिनों उफान पर है और पानी लबालब भरा हुआ है। ऐसे में गर्भवती को नदी पार कराना जोखिम भरा था।

    सोमवारी देवी के पति मांगूछाता नाग और अन्य ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाई और उन्हें बेहद सावधानी से करकरी नदी पार कर अड़की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।

    इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की गंभीर कमी को उजागर किया। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के लोग वर्षों से नदी पर पुल और गांव तक पक्की सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई है।

    हर वर्ष बरसात में जलस्तर बढ़ते ही गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से कट जाता है और पूरा गांव टापू में तब्दील हो जाता है।

    बारिश के दिनों में सबसे अधिक परेशानी बीमारों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को होती है। अक्सर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत होती है, बच्चों का स्कूल आना-जाना मुश्किल हो जाता है और हर समय किसी बड़ी अनहोनी का डर बना रहता है।

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