धनबाद-गया रूट पर 242 KM तक दो नई रेल लाइनों का रास्ता साफ, 120 वर्ष पुराने हावड़ा-नई दिल्ली रेलमार्ग पर घटेगा दबाव
धनबाद-कोडरमा-गया रेलखंड पर 242 किमी लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने के लिए टेंडर जारी हो गया है, जिससे ...और पढ़ें

नए ट्रैक से परिचालन में सुधार होगा, योजना का शिलान्यास पीएम मोदी ने किया था।
HighLights
242 किमी तीसरी-चौथी रेल लाइन परियोजना शुरू।
ट्रेनों की गति बढ़ेगी, परिचालन होगा सुरक्षित।
हावड़ा-नई दिल्ली मार्ग पर दबाव होगा कम।
संवाद सूत्र, झुमरीतिलैया (कोडरमा)। करीब 120 वर्ष पुराने हावड़ा-नई दिल्ली रेलमार्ग के ग्रैंड कार्ड सेक्शन में ट्रेनों के बढ़ते दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। धनबाद रेल मंडल के अंतर्गत धनबाद-कोडरमा-गया रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
मल्टी ट्रैकिंग परियोजना के तहत पहाड़पुर से कोडरमा होते हुए औरंगाबाद के चिरैला-पौथू तक करीब 242 किलोमीटर लंबी अतिरिक्त रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद धनबाद-कोडरमा-गया रेलखंड पर ट्रेनों के परिचालन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मौजूदा दो रेल लाइनों पर ट्रेनों के अत्यधिक दबाव के कारण जहां परिचालन प्रभावित होता है, वहीं कई बार ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर रोककर आगे का रास्ता दिया जाता है। नई रेल लाइन बनने से ट्रेनों के निर्बाध परिचालन में मदद मिलेगी और यात्री ट्रेनों के समयपालन में भी सुधार आने की उम्मीद है।
ईपीसी मोड में जारी हुआ टेंडर
करीब 242 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परियोजना के लिए पूर्व मध्य रेल के सिग्नल एंड टेलीकाम विभाग की ओर से ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड में टेंडर जारी किया गया है।
ईपीसी व्यवस्था के तहत चयनित एजेंसी को परियोजना के डिजाइन, सामग्री की आपूर्ति और निर्माण सहित विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारी एक साथ दी जाएगी। इससे परियोजना के क्रियान्वयन में समन्वय बेहतर रहने और निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है।
प्रतिदिन गुजरती हैं 100 से अधिक यात्री ट्रेनें
धनबाद-कोडरमा-गया रेलखंड रेलवे के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह मार्ग हावड़ा-नई दिल्ली रेलमार्ग के व्यस्त ग्रैंड कार्ड सेक्शन का हिस्सा है। इस रेलखंड से मालगाड़ियों के साथ प्रतिदिन 100 से अधिक यात्री ट्रेनों का परिचालन होता है। इनमें वंदे भारत, राजधानी एक्सप्रेस और दुरंतो एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें भी शामिल हैं।
यात्री ट्रेनों के अलावा इस मार्ग पर बड़ी संख्या में मालगाड़ियों का भी आवागमन होता है। औद्योगिक और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस रेलखंड पर माल एवं यात्री ट्रेनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा दो रेल लाइनों पर परिचालन का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
नई ट्रेनों के परिचालन की बढ़ेगी संभावना
दो अतिरिक्त रेल लाइनें उपलब्ध होने के बाद यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन के लिए अलग-अलग ट्रैक का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा। इससे ट्रेनों को प्राथमिकता के अनुसार संचालित करने में रेलवे को सुविधा मिलेगी।
साथ ही, वर्तमान में क्षमता की कमी के कारण जिन नई ट्रेनों के संचालन में व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं, उनके लिए भी रास्ता आसान हो सकता है। परियोजना पूरी होने के बाद इस महत्वपूर्ण रेलखंड की लाइन क्षमता बढ़ेगी और भविष्य में यात्रियों की बढ़ती मांग के अनुरूप नई यात्री ट्रेनों के परिचालन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
आधुनिक सिग्नलिंग और टेलीकाम प्रणाली से बढ़ेगी सुरक्षा
नई रेल लाइनों के निर्माण के साथ आधुनिक सिग्नल एवं टेलीकाम प्रणाली विकसित करने की भी योजना है। इससे ट्रेन परिचालन को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल बनाने में मदद मिलेगी। आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था के कारण ट्रेनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा और रेल परिचालन में मानवीय हस्तक्षेप को भी कम करने में सहायता मिलेगी।
अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से ट्रेनों को अनावश्यक रूप से रोकने की जरूरत कम होगी। इससे यात्रा का समय घटाने और ट्रेनों की औसत गति में सुधार की दिशा में भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
2024 में हुआ था परियोजना का शिलान्यास
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2024 को इस महत्वपूर्ण परियोजना का शिलान्यास किया था। अब टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही परियोजना के निर्माण कार्य के धरातल पर उतरने की उम्मीद बढ़ गई है। रेलवे के इस विस्तार से न केवल धनबाद-कोडरमा-गया रेलखंड की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि हावड़ा-नई दिल्ली जैसे देश के सबसे महत्वपूर्ण रेल मार्गों में शामिल इस सेक्शन पर परिचालन को और सुचारु बनाने में भी मदद मिलेगी।
242 किलोमीटर लंबे इस मल्टी ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को क्षेत्र के रेल यातायात के लिए अहम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद ट्रेनों के बढ़ते दबाव से राहत मिलने, परिचालन में सुधार आने और भविष्य में रेल सेवाओं के विस्तार के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना तैयार होने की उम्मीद है।
