बेतला नेशनल पार्क में वन्यजीव फंड के दुरुपयोग का आरोप, फर्जी मजदूर और सप्लायरों के नाम पर भुगतान
आरोप है कि वित्तीय वर्ष के अंत में बजट खर्च दिखाने की जल्दबाजी में फर्जी मजदूर और अस्तित्वहीन सप्लायरों के नाम पर भुगतान किया गया। स्थानीय लोग उच्चस्त ...और पढ़ें
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बेतला नेशनल पार्क। फोटो-सोशल मीडिया

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, बरवाडीह (लातेहार)। देश-विदेश में अपनी समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। पार्क में जानवरों की सुरक्षा, रखरखाव और विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग का सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 31 मार्च तक बजट खर्च दिखाने की होड़ में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। आरोप है कि कागजों पर फर्जी मजदूर दिखाकर और अस्तित्वहीन सप्लायरों के नाम पर भुगतान कर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। कई मामलों में बिना काम हुए ही भुगतान निकाल लेने की भी चर्चा है।
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यदि ये आरोप सही हैं, तो यह न सिर्फ सरकारी पैसे की बर्बादी है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है। सवाल उठ रहा है कि जिन संसाधनों का उपयोग जंगल और जीव-जंतुओं की सुरक्षा में होना चाहिए, क्या वह सिर्फ कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह गया है?
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे सवाल
इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को लेकर क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों की मांग है कि उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सके।
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अब नजरें प्रशासन पर टिकी हैं- क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? सच्चाई सामने आना न केवल जरूरी है, बल्कि वन्यजीवों के भविष्य के लिए भी बेहद अहम है।