लोहरदगा के कैरो में एक करोड़ की सड़क एक साल में जर्जर, गुणवत्ता पर सवाल
लोहरदगा के कैरो प्रखंड में आरईओ द्वारा एक करोड़ की लागत से बनी तीन किलोमीटर सड़क एक साल में ही जर्जर हो गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में निर्मित यह सड़ ...और पढ़ें

एक साल पूर्व बनाई गई कैरो-गोपालगंज सड़क हो गई जर्जर।
HighLights
एक करोड़ की सड़क एक साल में ही जर्जर।
ग्रामीणों ने निर्माण में गुणवत्ता पर उठाए गंभीर सवाल।
किसानों को फसल बाजार तक ले जाने में दिक्कत।
जागरण संसू, कैरो (लोहरदगा)। सरकारी धन का किस तरह दुरुपयोग होता है, इसकी बानगी लोहरदगा जिले के कैरो प्रखंड में देखने को मिल रही है। यहां आरईओ (REO) विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई तीन किलोमीटर लंबी सड़क महज एक साल के भीतर ही पूरी तरह जर्जर हो गई है।
सड़क की हालत इतनी खराब है कि अब यहाँ वाहनों की बात तो दूर, पैदल चलना भी किसी जोखिम से कम नहीं है।
गुणवत्ता को ताक पर रखकर हुआ निर्माण
कैरो-चट्टी मुख्य पथ से गोपालगंज तक जाने वाली यह सड़क ग्रामीणों के लिए विकास की उम्मीद लेकर आई थी, लेकिन निर्माण के समय ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठे थे। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान मानक (Specifications) की जमकर अनदेखी की गई।
भारी वाहनों के दबाव को झेलना तो दूर, सामान्य आवागमन से ही सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं। आज स्थिति यह है कि सड़क को देखकर लगता ही नहीं कि यह एक साल पुरानी है, बल्कि यह दशकों पुरानी जर्जर पगडंडी जैसी नजर आती है।
इन गांवों का टूटा संपर्क, किसान सबसे ज्यादा परेशान
यह सड़क चाल्हो, गोपालगंज और महुवरी जैसे दर्जनों गांवों को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाली एकमात्र लाइफलाइन है। जर्जर सड़क के कारण किसानों को अपनी फसल बाजार तक ले जाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने एक अच्छी सड़क का सपना देखा था, लेकिन घटिया निर्माण ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है।
प्रशासनिक आश्वासन: जांच के बाद होगी कार्रवाई
इस मामले पर कैरो बीडीओ छंदा भट्टाचार्य ने कहा कि यदि ग्रामीण इस संबंध में लिखित आवेदन देते हैं, तो एक टेक्निकल टीम गठित कर सड़क की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजी जाएगी और दोषी एजेंसी पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सड़क निर्माण के समय ही हमने चेतावनी दी थी कि काम घटिया हो रहा है। ठेकेदार ने अनसुना कर दिया और आज खामियाजा हम ग्रामीण भुगत रहे हैं।
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पंकज साहू, ग्रामीण, चाल्हो
हमने कार्यान्वयन एजेंसी के मुंशी से बार-बार गुणवत्ता सुधारने को कहा, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर काम पूरा कर दिया गया। अब अधिकारी और जनप्रतिनिधि कोई सुध नहीं ले रहे।
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रिजवान अंसारी, ग्रामीण, चाल्हो