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    मछलीपालन से संवर रही लोहरदगा के किसानों की जिंदगी, कम खर्चे में 5 लाख तक कमाई 

    Updated: Wed, 15 Jul 2026 03:20 PM (IST)

    लोहरदगा के कैरो प्रखंड में मत्स्य पालन से ग्रामीण आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। यह कम पूंजी में लाखों की कमाई का जरिया बन गया है, जिससे लोगों की जिं ...और पढ़ें

    मछली का बीज डालते किसान। फोटो जागरण

    मछली का बीज डालते किसान। फोटो जागरण

    HighLights

    1. कैरो प्रखंड में मत्स्य पालन से ग्रामीण हो रहे सशक्त।

    2. कम पूंजी में लाखों की कमाई का बेहतर जरिया।

    3. सरकारी अनुदान से मछली का जीरा उपलब्ध कराया जाता है।

    शंभू प्रसाद सोनी, कैरो (लोहरदगा)। लोहरदगा जिले के कैरो प्रखंड अंतर्गत दर्जन भर से अधिक गांवों के तालाब में मत्स्य पालन कर लोग आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

    प्रखंड के उतका, टाटी, चाल्हो, चरिमा, गितिलगढ़ आदि गांवों में मत्स्यजीवी समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष मछली का जीरा डाला जाता है, जिससे प्रत्येक वर्ष मत्स्य पालन करने वाले लोगों को लाखों की कमाई होती है। मत्स्य पालन कर लोग अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में लगे हुए हैं। मत्स्य पालन लोगों को रोजगार देकर आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है।

    अगर बेहतर तरीके से इसे किया जाय तो सलाना चार से पांच लाख तक की आमदनी हो जाती है। टाटी तालाब में घंटा के अनुसार, लोगों को बैठकर मछली मारने दिया जाता है, जिससे भी समिति को बेहतर आमदनी हो जाती है।

    मत्स्य पालन काफी कम पूंजी में अधिक कमाई का जरिया है। इसमें न तो किसी प्रकार का नुकसान है और न ही अधिक मेहनत। तालाब में जीरा डालकर छोड़ दिया जाता है, जिसके बाद मछली बड़ी हो जाती है। मत्स्य पालन में सरकार द्वारा भी अनुदानित दर पर जीरा व अन्य सामग्री दिया जाता है।

    मछली बेचने के लिए लोगों को कहीं बाहर नहीं जाना पड़ता है, व्यापारी आकर तालाब से ही मछली खरीदकर ले जाते हैं। मछलियों को तैयार होने में एक वर्ष लग जाते हैं। एक वर्ष में मछली का वजन एक किलोग्राम से लेकर डेढ़ किलोग्राम तक हो जाता है।

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    मत्स्यजीवी समिति से जुड़ें हैं एक दर्जन तालाब

    कैरो प्रखंड अंतर्गत एक दर्जन तालाब मत्स्यजीवी समिति से जुड़ें हुए हैं। जिन्हें सरकारी स्तर से जीरा व्यवस्था कर संबंधित गांव के सदस्यों को तालाब में डालने के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

    प्रखंड के उतका, गजनी, पाचागाई, हनहट, ख्वास अंबवा, चाल्हो, टाटी, नगड़ा, सढ़ाबे, चेरिमा, गितिलगढ़ आदि गांवों के तालाबों में मत्स्यजीवी समिति के माध्यम से मछली पालन किया जाता है।

    इससे जुड़े लोग अपनी जीविकोपार्जन कर रहे हैं। वहीं कुछ तालाबों में सदस्य स्वयं से हाइब्रिड मछली का जीरा डालते हैं, जो कम समय में तैयार हो जाता है।

    जीविकोपार्जन का बेहतर जरिया है मछली पालन

    मछली पालन कर क्षेत्र के सैकड़ों लोग बेहतर आमदनी कर रहे हैं। कुछ लोग अपने खर्चे से तालाब निर्माण कराकर मछली पालन कर रहे हैं। वर्तमान समय में मत्स्य पालन जीविकोपार्जन का बेहतर जरिया है।

    अगर वृहद तरीके से मछली पालन किया जाय तो सलाना चार से पांच लाख रुपए की आमदनी हो जाती है। कैरो प्रखंड क्षेत्र में सरकारी तालाबों के अलावे निजी तालाब में भी लोग मछली पालन कर अपने आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहे हैं।

    लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए कई प्रकार की सरकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। जिसमें एक मछली पालन भी है। अनुदानित दर पर लोगों को मछली का जीरा दिया जाता है। जिससे वे आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। -छंदा भट्टाचार्य, बीडीओ, कैरो।