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    लोहरदगा के मटर की तीन राज्यों में डिमांड, किसानों को मिल रहा अच्छा मुनाफा 

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 04:07 PM (GMT+05:30)

    लोहरदगा के कैरो प्रखंड के किसान मटर की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं। अनुकूल मौसम और बढ़ती मांग के कारण इस बार किसानों के चेहरे खिले हैं। कैरो की मटर ...और पढ़ें

    मटर की खेती। फाइल फोटो

    मटर की खेती। फाइल फोटो

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    शंभू प्रसाद सोनी, कैरो (लोहरदगा)। लोहरदगा जिले के कैरो प्रखंड क्षेत्र के किसान मटर की खेती से बेहतर आमदनी कर रहे हैं। वर्तमान समय में हरी मटर की बढ़ती मांग और अनुकूल मौसम के कारण इस बार किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।

    खेती को अक्सर जुआ की संज्ञा दी जाती है, जिसमें कभी नुकसान तो कभी बेहतर मुनाफा हाथ लगता है, पर इस बार शुरुआत में किसानों को मटर का दाम 80 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिला, जबकि वर्तमान में भी 30 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मटर की बिक्री हो रही है।

    कैरो प्रखंड क्षेत्र में उत्पादित मटर का स्वाद अब झारखंड की सीमाओं को पार कर उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बिहार सहित अन्य राज्यों तक पहुंच चुका है। यहां से प्रतिदिन लगभग 25 से 30 क्विंटल हरी मटर बाहर के राज्यों और झारखंड के विभिन्न जिलों में भेजी जा रही है। खास बात यह है कि किसानों को अपनी उपज मंडी तक ले जाने की परेशानी नहीं उठानी पड़ रही है, क्योंकि थोक व्यापारी सीधे खेतों से ही मटर खरीद रहे हैं।

    कैरो प्रखंड के कैरो, सढ़ाबे, उतका, खंडा, विराजपुर, उल्टी, गजनी, नरौली सहित कई गांवों में बड़े पैमाने पर मटर की खेती की जा रही है। पहले जहां किसान सीमित क्षेत्र में मटर की खेती करते थे, वहीं अब किसान बेहतर दाम और सुनिश्चित बाजार मिलने से इसका खेती कार्य तेजी से बढ़ा है।

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    मटर की खेती से किसानों को कम समय में अच्छी आमदनी हो रही है, जिससे वे अन्य फसलों की तुलना में इसे अधिक लाभकारी मान रहे हैं। जिले के अन्य प्रखंडों कैरो, भंडरा, किस्को, सेन्हा और लोहरदगा सदर में भी मटर की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है।

    बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता के कारण लोहरदगा की हरी मटर की मांग अब झारखंड के बाहर दूसरे प्रदेशों में लगातार बढ़ रही है। व्यापारी लोहरदगा से मटर खरीदकर बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की मंडियों में भेज रहे हैं।

    क्या कहते हैं क्षेत्र के किसान

    कैरो प्रखंड क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस वर्ष मौसम पूरी तरह अनुकूल रहा, जिससे मटर की फसल अच्छी हुई है। समय पर बुआई, पर्याप्त सिंचाई और उन्नत बीजों के प्रयोग से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। खेतों में तैयार हो रही ताजी हरी मटर को सीधे मंडी और थोक व्यापारियों तक पहुंचाया जा रहा है।

    इसके बाद पिकअप और ट्रकों के माध्यम से इसे दूसरे प्रदेशों की मंडियों तक भेजा जाता है। किसानों के अनुसार, पहले मटर की खेती केवल घरेलू उपयोग या स्थानीय बाजार तक ही सीमित थी, लेकिन अब बाहरी राज्यों से मांग बढ़ने के कारण उन्हें बेहतर दाम मिल रहा है। वर्तमान समय में मंडी में हरी मटर 30 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

    लोहरदगा की मटर का स्वाद है खास

    व्यापारियों का कहना है कि लोहरदगा, विशेषकर कैरो क्षेत्र की मटर स्वाद और गुणवत्ता के मामले में बेहतर है। यही वजह है कि दूसरे राज्यों के व्यापारी स्वयं यहां पहुंचकर माल उठा रहे हैं। मटर को सुबह के समय तोड़ा जाता है, ताकि उसकी ताजगी बनी रहे। इसके बाद बोरे और क्रेट में पैक कर बाहर भेजा जाता है।

    कैरो प्रखंड क्षेत्र से लगातार दूसरे प्रदेशों में मटर भेजी जा रही है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं। सरकार द्वारा किसानों के हित में कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। यदि किसान इन योजनाओं का लाभ उठाएं तो वे वृहद पैमाने पर खेती कर अपनी आमदनी और अधिक बढ़ा सकते हैं। -विनय उरांव, प्रभारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी, कैरो।