लोहरदगा में आसमानी आफत: वज्रपात से आम के पेड़ में लगी आग, खेत में काम कर रहा युवक झुलसा, सदर अस्पताल में भर्ती
लोहरदगा के चितरी अंबा टोली में वज्रपात से एक आम का पेड़ जल गया और खेत में काम कर रहा युवक सलमान अंसारी गंभीर रूप से घायल हो गया। झारखंड में वज्रपात की ...और पढ़ें

वज्रपात गिरने से खेत में खड़े पेड़ में लगी आग।
HighLights
लोहरदगा में वज्रपात से आम का पेड़ धू-धू कर जला।
खेत में काम कर रहा युवक सलमान अंसारी गंभीर रूप से घायल।
झारखंड वज्रपात प्रोन राज्य, भौगोलिक और खनिज कारण मुख्य।
संसू, सेन्हा (लोहरदगा)। झारखंड में लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र अंतर्गत चितरी अंबा टोली गांव में रविवार को तेज बारिश के दौरान हुए भीषण वज्रपात (आकाशीय बिजली) के कारण एक आम का पेड़ धू-धू कर जल गया। वहीं खेत में काम कर रहा एक युवक इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
दो दिनों तक सुलगता रहा आम का पेड़
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार को गांव के राजधानी उरांव के खेत में स्थित एक बड़े आम के पेड़ पर जोरदार बिजली गिरी। वज्रपात इतना शक्तिशाली था कि पेड़ में तुरंत आग लग गई।
खेत में पानी भरा होने और आसपास कुआं या तालाब जैसी सुविधा न होने के कारण ग्रामीण आग पर काबू नहीं पा सके। स्थिति यह रही कि पेड़ सोमवार तक लगातार सुलगता रहा और अंततः पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया।
खेत में काम कर रहा युवक घायल
जिस वक्त यह घटना हुई, घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर अंबा टोली निवासी अजीज अंसारी का पुत्र सलमान अंसारी अपने खेत में काम कर रहा था। वज्रपात के जोरदार झटके और तरंगों की चपेट में आने से सलमान गंभीर रूप से झुलस गया और वहीं गिर पड़ा।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए उसे सदर अस्पताल लोहरदगा पहुंचाया, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है।
झारखंड में ही क्यों गिरती है सबसे ज्यादा आकाशीय बिजली?
झारखंड को देश के सबसे संवेदनशील वज्रपात प्रोन (Lightning-Prone) राज्यों में गिना जाता है। मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे प्रमुख भौगोलिक और वायुमंडलीय कारण हैं:
- छोटा नागपुर पठार की भौगोलिक स्थिति: झारखंड की स्थलाकृति (Topology) उबड़-खाबड़ और पहाड़ी है। पठारी इलाका होने के कारण यहाँ गर्म हवाएं तेजी से ऊपर उठती हैं और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त ठंडी हवाओं से टकराती हैं, जिससे अत्यधिक ऊंचे कम्युलोनिम्बस (Cumulonimbus) बादल बनते हैं। ये बादल आकाशीय बिजली के मुख्य स्रोत हैं।
- खनिजों की प्रचुरता: झारखंड की धरती के नीचे और चट्टानों में आयरन (लोहा), कोयला, अभ्रक और यूरेनियम जैसे खनिजों का भारी भंडार है। यह अत्यधिक खनिज घनत्व प्राकृतिक रूप से एक 'अर्थिंग' या कंडक्टर की तरह काम करता है, जो बादलों के इलेक्ट्रिक चार्ज को अपनी ओर तेजी से आकर्षित करता है।
- जंगलों और ऊंचे पेड़ों की संख्या: राज्य में घने जंगल और ऊंचे पेड़ों (जैसे ताड़, महुआ और आम) की भरमार है, जो बिजली गिरने के लिए 'प्राइमटारगेट' बन जाते हैं।
लोहरदगा जिले में वज्रपात का आंकड़ा
आकाशीय बिजली झारखंड के लिए एक बड़ी प्राकृतिक आपदा बन चुकी है। सरकारी आंकड़ों और आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार:
- वार्षिक हताहत: पिछले एक वर्ष के दौरान अकेले लोहरदगा जिले में वज्रपात की विभिन्न घटनाओं में 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल या दिव्यांग हुए हैं।
- पशुधन को नुकसान: इंसानों के अलावा हर साल जिले में औसतन 40-50 मवेशियों (गाय, बैल, बकरी) की जान भी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से जाती है।
- सबसे प्रभावित समय: राज्य में जून से लेकर सितंबर (मानसून अवधि) के बीच सबसे ज्यादा वज्रपात दर्ज किया जाता है।