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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Lohardaga Vidhan Sabha Result: लोहरदगा सीट पर चौंकाने वाला परिणाम, कांग्रेस ने बीजेपी को भारी मतों दी मात

    Updated: Sat, 23 Nov 2024 05:33 PM (IST)

    Lohardaga Vidhan Sabha Seat Winner 2024 झारखंड की लोहरदगा विधानसभा सीट पर इस बार कांटे की टक्कर है। इस सीट से BJP की नीरू शांति भगत चुनावी मैदान में ह ...और पढ़ें

    लोहरदगा विधानसभा सीट परिणाम 2024 (जागरण फोटो)
    लोहरदगा विधानसभा सीट परिणाम 2024 (जागरण फोटो)

    HighLights

    1. कांग्रेस के डॉ. रामेश्वर उरांव ने नीरू शांति भगत को पराजित किया।
    2. डा. रामेश्वर उरांव को 113507 और नीरू शांति भगत को मिले 78837 वोट।
    3. लोहरदगा विधानसभा सीट के लिए हुए मतदान में नोटा को भी 908 वोट मिला।
    4. पोस्टल बैलेट की गिनती में भी डा. रामेश्वर ने 1915 वोट लाकर रहे सबसे आगे।

    डिजिटल डेस्क, लोहरदगा। Lohardaga Assembly Seat Result 2024: झारखंड की लोहरदगा विधानसभा सीट पर सभी 18 राउंड की गिनती पूरी हो चुकी है। इस सीट पर कांग्रेस के रामेश्वर उरांव ने जीत दर्ज की है। उनके सामने चुनावी मैदान में उतरी बीजेपी की नीरू शांति 34670 वोटों से हार गई हैं। बता दें कि लोहरदगा सीट झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में महत्‍वपूर्ण स्‍थान रखती है।

    झारखंड विधानसभा के लिए 2005 में कराए गए चुनाव में कांग्रेस के नेता सुखदेव भगत विधायक चुना गया। 2009 में यहां से ऑल झारखंड स्‍टूडेंट्स यूनियन के नेता कमल किशोर भगत विधायक चुने गए। वह 2014 में भी विधायक बने। 2015 में कराए गए उपचुनाव में यहां से कांग्रेस ने जीत दर्ज की।

    लोहरदगा विधानसभा सीट पर मतदाताओं ने एक बार फिर इतिहास लिख दिया है। इंडिया गठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी डा. रामेश्वर उरांव को लोहरदगा विधानसभा सीट से ऐतिहासिक जीत मिली है। डा. रामेश्वर उरांव ने इस चुनाव में 113507 वोट हासिल किए हैं। डा. रामेश्वर उरांव ने एनडीए गठबंधन के आजसू पार्टी प्रत्याशी नीरू शांति भगत को 34670 वोटों के अंतर से हरा दिया है।

    नीरू शांति भगत को इस चुनाव में 78837 वोट मिले। जबकि तीसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी रामेश्वर लोहरा रहें, जिन्हें 4010 वोट लाकर संतोष करना पड़ा। मजेदार बात यह है कि इस बार के चुनाव में पोस्टल बैलेट की गिनती में भी कांग्रेस प्रत्याशी डा. रामेश्वर उरांव 1915 वोट लाकर अन्य प्रत्याशियों से आगे रहे। मतों की गिनती में नोटा को सिर्फ 908 वोट मिले।

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    लोहरदगा की जनता या कहें कि मतदाताओं ने जनादेश देते हुए कांग्रेस पर भरोसा जताया है। डा. रामेश्वर उरांव को लोहरदगा सीट से दुबारा नया विधायक चुन लिया है। इस प्रकार से लोहरदगा विधानसभा चुनाव का परिणाम बेहद चौंकाने वाला रहा है। आमने-सामने के मुकाबले के बीच लोहरदगा में विधानसभा चुनाव को लेकर किसी की हार या जीत के बीच के अंतर को स्पष्ट कर पाना बिल्कुल मुश्किल था।

    ऐसे में 34670 वोटों के अंतर से डा. रामेश्वर उरांव की जीत ने यह बता दिया कि मतदाताओं ने खामोशी से ईवीएम का बटन दबाते हुए लोहरदगा के मतदाताओं ने राज्य सरकार के समर्थन में अपनी वोट डालकर नया जनादेश देने का काम किया। लोहरदगा सीट से चुनाव जीतने के बाद कृषि बाजार स्थित मतगणना केंद्र में निर्वाची पदाधिकारी 72-लोहरदगा(एसटी)-सह-अनुमंडल पदाधिकारी लोहरदगा अमित कुमार ने कांग्रेस उम्मीदवार डा. रामेश्वर उरांव को जीत का प्रमाण-पत्र दिया।

    किस दल के प्रत्याशी को मिले कितने वोट

    क्रम संख्या प्रत्याशी/ दल मिले वोट
    1. नीरू शांति भगत आजसू पार्टी 78,837
    2. यशपाल भगत बहुजन समाज पार्टी 1354
    3. रामेश्वर उरांव इंडियन नेशनल कांग्रेस 113507
    4. अनिल कुमार भगत झारखंड पीपुल्स पार्टी 1453
    5. अवधेश उरांव भारत आदिवासी पाटी 3159
    6. किशोर उरांव जेएलकेएम 1300
    7. पवन तिग्गा लोकहित अधिकार पार्टी, झारखंड 767
    8. बिहारी भगत पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया, डेमोक्रेटिक 704
    9. राजपति देवी बीजेजेपी 547
    10. बिरेंद्र उरांव स्वतंत्र 797
    11. बृज मोहन उरांव स्वतंत्र 448
    12. रमेश उरांव स्वतंत्र 656
    13. राजेश लोहरा स्वतंत्र 968
    14. रामेश्वर लोहरा स्वतंत्र 4010
    15. संतोष भगत स्वतंत्र 747
    16. सनीया उरांव स्वतंत्र 2002
    17. सोमा उरांव स्वतंत्र 1176

    लोहरदगा सीट का इतिहास

    उसके नेता सुखदेव भगत यहां से दूसरी बार विधायक चुने गए। 2019 में कांग्रेस पार्टी से रामेश्वर उरांव इस सीट से विधायक बने। यह सीट लोहरदगा जिला और लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में आती है। लोहरदगा जिले को 1983 में रांची से अलग कर बनाया गया। मान्‍यता है कि जैन धर्मावलंबियों के भगवान महावीर इस स्‍थान पर कुछ समय के लिए निवास किए थे। इस कारण लोहरदागा नाम पड़ा था। मुगल शासक अकबर पर लिखी पुस्तक आइन-ए-अकबरी में भी इस जिले का जिक्र किस्मत-ए-लोहरदगा के रूप में मिलता है।