उपेक्षा के साये में लोहरदगा का 'महादेव मंडा', प्रशासनिक अनदेखी से मिट रहे प्राचीन अवशेष
लोहरदगा के कैरो प्रखंड में स्थित 14वीं सदी का प्राचीन 'महादेव मंडा' स्थल प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। यहां के अवशेष और रहस्यमयी मान्यताएं लोगों को च ...और पढ़ें

लोहरदगा का महादेव मंडा
HighLights
लोहरदगा का 14वीं सदी का महादेव मंडा उपेक्षा से जर्जर।
रहस्यमयी ढोल-नगाड़ों की आवाज अब नहीं सुनाई देती।
ग्रामीण कर रहे प्राचीन स्थल के संरक्षण की मांग।
शंभू प्रसाद सोनी, कैरो (लोहरदगा)। जिले के कैरो प्रखंड अंतर्गत गजनी गांव के घने जंगलों के बीच स्थित ‘महादेव मंडा’ एक ऐसा प्राचीन स्थल है, जो अपने इतिहास और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण लोगों को चकित कर देता है। माना जाता है कि यह मंदिर 14वीं शताब्दी का है, जिसके अवशेष आज भी यहां मौजूद हैं। हालांकि प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही है।
महादेव मंडा परिसर में पत्थर से निर्मित चक्र, छोटे-बड़े शिवलिंग, राधा-कृष्ण, सीता-राम समेत कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यह स्थल कभी भव्य मंदिर का केंद्र रहा होगा, जिसके प्रमाण आज भी यहां बिखरे अवशेषों में देखने को मिलते हैं।
मंदिर परिसर में कोई वाद्ययंत्र नहीं
महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों के अनुसार, करीब 20 से 50 वर्ष पहले तक यहां रात के समय, खासकर आधी रात को ढोल-नगाड़ों की आवाज सुनाई देती थी।
आश्चर्य की बात यह थी कि मंदिर परिसर में कोई वाद्ययंत्र नहीं बजता था, फिर भी यह ध्वनि सुनाई देती थी। समय के साथ यह रहस्यमयी आवाज अब बंद हो गई है, लेकिन इसकी चर्चा आज भी गांव में होती है। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की है कि इस प्राचीन स्थल को संरक्षित कर इसे पर्यटन मानचित्र पर स्थान दिलाया जाए, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान बची रह सके।
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पुरातत्व सर्वेक्षण में सामने आया इतिहास
कुछ वर्ष पूर्व पुरातत्वविद हरेंद्र सिन्हा ने कैरो क्षेत्र के प्राचीन स्थलों का सर्वेक्षण किया था। उन्होंने महादेव मंडा को 14वीं शताब्दी का बताया और यहां भव्य मंदिर होने के संकेत दिए। हालांकि उन्होंने इस स्थल पर विस्तृत और पुनः सर्वेक्षण की आवश्यकता भी जताई थी, ताकि इसके इतिहास से जुड़े और तथ्य सामने आ सकें।
विकास की घोषणाएं, जमीन पर पहल शून्य
लोहरदगा के तत्कालीन उपायुक्त आराधना पटनायक ने भी इस स्थल का निरीक्षण कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बात कही थी। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। केवल मंदिर परिसर की चहारदीवारी का निर्माण कराया गया है, जो अपर्याप्त साबित हो रहा है।
कुंआ भी हुआ विलुप्त, जुड़ा था धार्मिक संबंध
ग्रामीणों के अनुसार, यहां एक प्राचीन कुआं भी था, जिसका संबंध भंडरा के अखिलेश्वर धाम से बताया जाता था। अब यह कुआं धीरे-धीरे विलुप्त हो चुका है, जिससे इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व और कम होता जा रहा है।
महादेव मंडा के इतिहास की जानकारी विस्तार से जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। देश की धरोहरों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, पर इसके लिए स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों का सहयोग भी जरूरी है।- छंदा भट्टाचार्य, बीडीओ, कैरो।